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मोदी सरकार का आम बजट आज, वित्तमंत्री से पंजाब को बड़ी आस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 29 Feb 2016 09:41 AM IST
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केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली आज आम बजट पेश करेंगे और मोदी सरकार के इस बजट से पंजाब के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। बजट से सूबे की इंडस्ट्री को जहां ऑक्सीजन और लेवल प्लेइंग फील्ड चाहिए। वहीं, खेतीबाड़ी को भी मौजूदा संकट से राहत की दरकार है।
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निटवियर इंडस्ट्री को चाहिए लेवल प्लेइंग फील्ड
निटवियर क्लब लुधियाना के प्रधान विनोद थापर के मुताबिक टेक्सटाइल मशीनरी की 80 फीसदी से ज्यादा चीजों पर कस्टम ड्यूटी है। जबकि, प्रतिद्वंद्वी देशों चीन, श्रीलंका, पाकिस्तान व बांग्लादेश में ऐसा नहीं है। बांग्लादेश में तो जीरो ड्यूटी है। जब तक घरेलू इंडस्ट्री को लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं मिलेगा, वे मुकाबला कैसे कर सकते हैं। इसके अलावा सरकार जब भी फॉरेन ट्रेड एग्रीमेंट करे तो घरेलू उद्यमियों को भी भरोसे में लिया जाए। पिछले दिनों सरकार ने बांग्लादेश के साथ ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का एफटीए किया है। इंडस्ट्री की मांग है कि अगर किसी बड़ी कंपनी को एफडीआई की इजाजत दी जाए तो साथ में यह शर्त भी रखी जाए कि वह कम से कम 70 प्रतिशत माल घरेलू इंडस्ट्री से लेगा। वरना वे कंपनियां बांग्लादेश से सस्ता माल ले लेती हैं। लुधियाना में एग्जीबिशन सेंटर की मांग वर्षों से लंबित है। हर साल इंडस्ट्री अस्थाई स्ट्रक्चर बनाती है, जिस पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं।
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नई टेक्सटाइल पॉलिसी में राहत की उम्मीद
टेक्सटाइल एसोसिएशन, अमृतसर के प्रधान पीएल सेठ को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की नई टेक्सटाइल पॉलिसी से उम्मीदें हैं। इसमें चार राहत दी जाने की आस है। लेबर रिफॉर्म के तहत सरकार महिला कर्मियों को नाइट शिफ्ट में काम करने की इजाजत दे सकती है। यह सेक्टर खेतीबाड़ी के बाद सबसे ज्यादा रोजगार मुहैया करवाता है। इसलिए इसमें भी खेती की तरह ब्याज दर सात फीसदी करने की सिफारिश की गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में भी उद्यमियों ने यह मांग रखी थी, क्योंकि चीन में ब्याज दर पांच प्रतिशत है। अब वहां लेबर कॉस्ट बढ़ गई है, जिससे भारत के लिए अवसर हैं। अभी वर्ल्ड ट्रेड में चीन की हिस्सेदारी 35-40 प्रतिशत और भारत की सिर्फ 3-5 फीसदी है। सरकार ने पॉवरलूम पर तीस प्रतिशत इंसेंटिव दिया था, जिसे घटा कर दस फीसदी कर दिया गया है। इसे दोबारा तीस फीसदी करने की मांग की गई है।
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स्पोर्ट्स गुड्स से एक्साइज ड्यूटी खत्म हो
स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री की मांग है कि सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म होनी चाहिए। खेल उद्योग संघ, जालंधर के प्रधान रविंदर धीर ने कहा कि कई सालों से यह मांग लंबित है। इससे घरेलू इंडस्ट्री को राहत मिलेगी। बाहर से आने वाले तैयार माल पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई जाए। वहीं, आयात होने वाले कच्चे माल पर ड्यूटी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, या फिर न्यूनतम होनी चाहिए। स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री लंबे समय से आरएंडडी सेंटर की मांग कर रही है, वह भी पूरी नहीं हुई है।
खेतीबाड़ी को राहत की कोई उम्मीद नहीं
भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल कहते हैं कि किसानों को केंद्रीय बजट से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। इस बजट में भी सब कुछ सिर्फ कॉरपोरेट घरानों के लिए ही होगा। अर्थशास्त्र का सिद्धांत है कि अगर खेती में एक प्रतिशत निवेश किया जाए तो गरीबी चार फीसदी घटती है, लेकिन सरकार किसानों की सुध लेने को तैयार ही नहीं है। केंद्र सरकार ने उद्योगों का 5.80 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया था। एक साल के लिए इतना पैकेज किसानों को भी दे दे। अब खेती को लाभप्रद बनाना जरूरी हो गया है। पर सरकार की प्राथमिकता कॉरपोरेट घराने ही हैं।
साइकिल पार्ट्स से एक्साइज ड्यूटी खत्म हो
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, लुधियाना के प्रधान चरनजीत विश्वकर्मा का कहना है कि दो प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी खत्म की जाए। चीन से आयात बढ़ता जा रहा है। घरेलू इंडस्ट्री को राहत देने के लिए सरकार इंपोर्ट ड्यूटी लगाए। पिछले दिनों चीन के स्टील पर ड्यूटी लगा दी गई, जिससे वह महंगा हो गया। इसे देखते हुए घरेलू स्टील इंडस्ट्री ने मिल कर रेट बढ़ा दिए। यह मनमाने ढंग से रेट बढ़ा देते हैं। इसे रोकने को स्टील रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाना चाहिए। फोकल प्वाइंट्स में बुनियादी ढांचे का विकास न होना और एयर लिंक न होना भी इंडस्ट्री के लिए मुश्किलें खड़ी करता है।
आबकारी छूट की सीमा बढ़ने की आस
मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अनुराग अग्रवाल ने कहा कि स्माल इंडस्ट्री के लिए आबकारी छूट की सीमा डेढ़ करोड़ है। इसे बढ़ाकर कम से कम पांच करोड़ किया जाना चाहिए। टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड के तहत सरकार एक करोड़ के निवेश पर पंद्रह लाख रुपये सब्सिडी देती है। यह सीमा भी बढ़ाकर तीन करोड़ की जानी चाहिए। स्माल स्केल इंडस्ट्री के लिए ब्याज दर काफी ज्यादा है। इसके लिए बेस रेट तय किया जाना चाहिए। इंडस्ट्रियल एरिया में सरकार बुनियादी ढांचे के विकास पर पैसे खर्च करे, उससे इंडस्ट्री को भी फायदा होता है।