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किसानों को एनआईए के नोटिस से सियासत गरमाई, निशाने पर केंद्र सरकार

Mon, 18 Jan 2021 03:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 18 Jan 2021 03:16 AM IST
सार

  • पंजाब की किसान यूनियनों सहित राजनीतिक दलों ने जताया विरोध, बोलीं- केंद्र बना रहा दबाव 
  • किसान संगठनों ने आंदोलन को जारी रख उग्र करने की दी चेतावनी

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Punjab news: NIA notice to farmers heats up politics in the state
सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कृषि कानूनों की मुखालफत कर रहे किसानों को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के नोटिस पर पंजाब की सियासत गरमा गई है। सत्तासीन कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने इसको लेकर केंद्र पर निशाना साधा है। साथ ही किसान यूनियनों ने भी नोटिस की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया प्रकट की है।

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किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि केंद्र सरकार नोटिस भेजकर आंदोलन को वापस लेने का दबाव बना रही है, लेकिन अब आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। वहीं कुछ किसान संगठनों ने एनआईए की जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया है। 
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पंजाब में 50 से अधिक किसानों को और आंदोलन का समर्थन करने वाले कलाकारों को एनआईए ने नोटिस भेज कर दिल्ली पेश होने को कहा है। किसान आंदोलन के बीच एनआईए के नोटिस से पंजाब का सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (शिअद), आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सहित अन्य दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
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राजनीतिक दलों ने इन नोटिसों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का कहना है कि इससे पहले भी केंद्र सरकार कई केंद्रीय एजेंसियों का अपने लाभ के लिए दुरुपयोग करती आई है। अब किसान आंदोलन को लेकर एनआईए का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने मांग की है कि किसानों की मांग जायज है और केंद्र सरकार को विवादित कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। 

किसान यूनियनों ने भी नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार आंदोलन वापस लेने के लिए दबाव बना रही है, लेकिन केंद्र की यह कोशिश नाकाफी रहेगी। किसान अब लड़ने-मरने का मन बना चुका है। किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र ऐसे हथकंडों से बाज नहीं आता है तो आंदोलन को उग्र करने पर किसान विवश हो जाएगा।


एनआईए का दुरुपयोग करके किसानों को केंद्र सरकार द्वारा डराना बंद करना चाहिए। इसके साथ ही विवादित तीनों कृषि कानूनों को तत्काल वापस लेना चाहिए।
- राजिंदर सिंह बडहेडी, अध्यक्ष, आल इंडिया जट्ट महासभा, चंडीगढ़

भाजपा सरकार द्वारा राजनीतिक हितों की खातिर सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। सरकार की किसानी संघर्ष को कमजोर करने की यह भद्दी चाल विफल साबित होगी।
- सुखजिंदर सिंह रंधावा, कैबिनेट मंत्री, पंजाब सरकार

एनआईए के नोटिस से यह साबित हो गया है कि केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन से बौखला गई है। वह नोटिस का दबाव बनाकर आंदोलन को वापस करवाना चाहती है, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाएगी।
- सुखबीर बादल, अध्यक्ष, शिरोमणि अकाली दल

केंद्र इससे पहले भी आंदोलन को वापस लेने की नाकाम कोशिश कर चुकी है, लेकिन किसानों के मजबूत इरादों के आगे सरकार इस बार फिर बेबस हो जाएगी। केंद्र के रुख से यह तय हो गया है कि आंदोलन अब उग्र होना चाहिए।
- सुखदेव सिंह कोकरी कलां, महासचिव, भाकियू एकता (उगराहां)

किसान संगठनों ने एनआईए की जांच में शामिल होने से किया इनकार 

उधर, कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसान संगठनों ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) की ओर से किसानों को भेजे गए नोटिस का विरोध करते हुए जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

वहीं कुछ सिख संगठनों के सदस्यों ने जांच में शामिल होने के निर्देश को स्वीकार कर लिया है। एनआईए ने अमृतसर में सिख यूथ फेडरेशन भिंडरावाला व सिख यूथ पावर ऑफ पंजाब के सदस्यों को नोटिस भेजे हैं। हालांकि सिरसा का कहना है कि वह वह अपनी नातिन की शादी में व्यस्त हैं इसलिए सिंघु बॉर्डर से अमृतसर आ गए हैं। उन्हें नोटिस मिला है, सात फरवरी के बाद ही इसके बारे में रुख स्पष्ट करेंगे। 

वहीं सिख यूथ पावर ऑफ पंजाब के नेता परमजीत सिंह अकाली व उनके संगठन से जुड़े पलविंदर सिंह अमरकोट जांच में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं। परमजीत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह 19 जनवरी को जांच में शामिल होंगे। जबकि पलविंदर सिंह 18 फरवरी को एनआईए के दफ्तर जाकर जांच में सहयोग करेंगे।

सिख यूथ फेडरेशन भिंडरावाले के मीत प्रधान रंजीत सिंह दमदमी ने बताया वह 21 जनवरी को जांच में शामिल होंगे। वहीं विरोध जताने वाले सिख संगठनों के नेताओं ने का कहना है कि केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रही है, इसलिए वह एनआईए की जांच कर विरोध करते हैं और इस तरह की जांच में शामिल नहीं होंगे, इसके लिए वह कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।

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