बेहद संवेनशील है पठानकोट, आयुध भंडार व एयरबेस स्टेशन भी यहीं पर, पाक को हमेशा सताता है डर
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पठानकोट दो तरफ से संवेदनशील सीमाओं से सटा है। एक तरफ बमियाल के साथ पाक और दूसरी तरफ माधोपुर के साथ जम्मू-कश्मीर की सीमा इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। पठानकोट में सेना का आयुध भंडार और पाकिस्तान से लेकर चीन की सीमा तक नजर रखने वाले एयरबेस के चलते सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र देश के संवेदनशील जिलों की श्रेणी में आता है। कई बार पठानकोट तक पाक प्रशिक्षित आतंकी पहुंच चुके हैं।
वर्ष 2014 तक बमियाल और नरोट जैमल सिंह से लगती पाकिस्तान की सीमा शांत थी। वर्ष 2015 के बाद से पठानकोट में आतंकी घटनाओं में इजाफा हुआ है। इस दौरान 2-3 बार पठानकोट से लगती पाकिस्तानी सीमा से घुसपैठ का प्रयास किया गया। अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ की कोशिश सुरक्षा बलों ने कामयाब नहीं होने दी।
हालांकि इन्हीं पांच वर्षों में दीना नगर हमला और पठानकोट एयरबेस अटैक जैसे बड़े मामले सामने आए हैं। जुलाई 2015 में दीनानगर थाने पर हमला, उसके बाद दो जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर अटैक और दिसंबर में बमियाल सीमा में घुसपैठ की कोशिश की गई। इसके बाद इसी साल 10 जून को पठानकोट पुलिस ने हथियारों की खेप ले जाते दो आतंकियों को गिरफ्तार किया और अगले ही दिन उनके तीसरे साथी को गिरफ्तार किया गया।
तीनों आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संपर्क में थे। इसी साल 28-29 जुलाई की देर रात पाकिस्तान से 2-3 लोगों ने ढींडा पोस्ट के पास से बार्डर क्रॉस कर भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश की। ड्यूटी पर तैनात बीएसएफ जवान ने उन पर फायरिंग कर दी। इस पर वह लोग पाकिस्तान की ओर भाग निकले।
पाकिस्तान को अखरता है पठानकोट एयरबेस
पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन हमेशा पाकिस्तान को अखरता रहा है। यह एयरबेस सुरक्षा के लिहाज से अति महत्वपूर्ण है। युद्ध के दौरान भी यही एयरफोर्स स्टेशन पाकिस्तान के लिए बड़ी सिरदर्दी का सबब बना है। यही वजह है कि 2 जनवरी 2016 की मध्यरात्रि को पाक समर्थित आतंकी संगठनों ने पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन को ही अपना निशाना बनाया।
अब इस एयरफोर्स स्टेशन पर अपाचे की स्कवाड्रन तैनात होने पर रणनीतिक नजरिए से इसका महत्व और बढ़ गया है। पहले भी भारत-पाक के बीच दो लड़ाई के दौरान भी इस स्टेशन को पाकिस्तान एयरफोर्स ने निशाना बनाते हुए एयर स्ट्राइक की थी। बॉर्डर के नजदीक होने की वजह से उत्तर भारत में वायुसेना की हर जरूरत को यहीं से पूरा किया जाता है। इतना ही नहीं इसी एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तान के साथ-साथ चीन बॉर्डर निगरानी संभव है। कारगिल युद्ध के दौरान इस एयरफोर्स स्टेशन ने पाकिस्तान की कमर तोड़ने में बेहतरीन भूमिका निभाई थी।