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सिंचाई घोटाला: पंजाब के दो अकाली नेताओं को लुकआउट नोटिस जारी, तीन रिटायर्ड IAS से भी होगी पूछताछ

Mon, 19 Sep 2022 12:47 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 19 Sep 2022 12:47 PM IST
सार

पंजाब में सिंचाई घोटाला उस समय सामने आया, जब विजिलेंस विभाग की तरफ से गिरफ्तार किए गए ठेकेदार गुरिंदर सिंह ने 17 अगस्त, 2017 को दो पूर्व मंत्रियों, तीन पूर्व आईएएस अफसरों और कुछ इंजीनियरों के नाम बताए।

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Punjab: Lookout notices of two Akali leaders issued in irrigation scam
scam - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने सिंचाई घोटाले की जांच शुरू करते हुए सोमवार को दो पूर्व मंत्रियों के अलावा तीन रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए हैं। 2017 में एक ठेकेदार की गिरफ्तारी से उजागर हुआ यह घोटाला पंजाब में अकाली-भाजपा शासन के दौरान हुआ था। इसमें सरकार के आला अफसरों से पूछताछ की तत्कालीन राज्य सरकार और उसके बाद कैप्टन व चरणजीत चन्नी सरकारों ने भी विजिलेंस को अनुमति नहीं दी थी। मौजूदा भगवंत मान सरकार द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद विजिलेंस ने उक्त घोटाले में जांच का काम फिर से शुरू कर दिया है।

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विजिलेंस ने जिन नेताओं और अफसरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए हैं, उनके नाम हैं- अकाली नेता जनमेजा सिंह सेखों, शरणजीत सिंह ढिल्लों, रिटायर्ड आईएएस अफसर सर्वेश कौशल, केबीएस सिद्धू और काहन सिंह पन्नू। पंजाब सरकार ने दो दिन पहले ही विजिलेंस को मामले की जांच की अनुमति दी थी। 
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विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि घोटाले में नामजद ठेकेदारों को पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया जाएगा। उनसे पूछताछ में जिन पूर्व अधिकारियों और नेताओं के नाम सामने आएंगे, उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा। विजिलेंस ने भ्रष्टाचार अधिनियम एक्ट की धारा 17 ए के तहत कार्रवाई की अनुमति की मांग की थी।
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यह है मामला
विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अगस्त 2017 में गिरफ्तार घोटाले के मुख्य आरोपी ठेकेदार गुरिंदर सिंह ने शपथ पत्र देकर कहा था कि सिंचाई घोटाले में तीन पूर्व आईएएस अधिकारी, दो पूर्व मंत्री और उनके निजी सचिव शामिल हैं। शपथ पत्र में ठेकेदार ने कहा कि काम दिलाने, बिल पास करने और टेंडर के नियम व शर्तों को उसके मुताबिक बनाने के लिए उक्त मंत्रियों, अफसरों ने उससे मोटी रकम हासिल की। 

ठेकेदार ने विजिलेंस को यह भी बताया था कि तीनों आईएएस अधिकारियों को कुल 21 करोड़ रुपये दिए जबकि दोनों मंत्रियों को 10 करोड़ रुपये दिए थे। इन बयानों के आधार पर विजिलेंस ने उक्त अफसरों और नेताओं से पूछताछ के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी ने अनुमति मांगी थी। 


विजिलेंस के सूत्रों के अनुसार ठेकेदार गुरिंदर सिंह को 2007 से 2016 तक 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के काम अलॉट हुए थे। इसे लेकर उसने इन अफसरों, पूर्व मंत्रियों को पैसा दिया। गुरिंदर सिंह के बारे में कहा जाता है कि सिंचाई विभाग में नीचे से लेकर ऊपर तक अफसर भी उसकी पसंद के ही लगते थे। 2006 में 4.75 करोड़ रुपये की उसकी कंपनी मात्र दस वर्ष में 300 करोड़ रुपये की हो गई। इस मामले में गुरिंदर सिंह और विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर विजिलेंस विभाग की गिरफ्त में हैं।

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