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Election Result: शिअद में नाराजगी... सुखबीर की बढ़ीं चुनौतियां, पूर्व सांसद ने किया किनारा; कई बड़े नेता नाराज

Sun, 09 Jun 2024 12:18 PM IST
शाहरुख खान सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 09 Jun 2024 12:18 PM IST
सार

शिअद में नाराजगी है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर की चुनौतियां बढ़ने लगीं हैं। पूर्व सांसद ने परमजीत कौर गुलशन ने किनारा कर लिया है। सुखदेव सिंह ढींडसा समेत कई बड़े नेता नाराज होकर घर बैठे हैं।

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Punjab Lok Sabha Election Result 2024 Shiromani Akali Dal Crisis Sukhbir Singh Badal MPs Leaders Stepped Asid
Punjab Lok Sabha Election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव समाप्त होते ही बुरी तरह से शिकस्त का संताप झेल रहे शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल के लिए मुसीबतें खड़ी होनी शुरू हो गई हैं। पिछले दो दिन में पार्टी के दो कद्दावर नेताओं ने पार्टी की गतिविधियों से किनारा करने का फैसला लेकर एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। 
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चुनाव के दौरान ही पूर्व मंत्री आदेश प्रताप कैरों को पार्टी ने निकाल दिया। कैरों सुखबीर बादल के जीजा हैं और पंजाब के पूर्व सीएम के पौत्र हैं। चुनाव के बुरे नतीजे आते ही मनप्रीत सिंह अयाली ने आवाज बुलंद करते हुए कहा कि पार्टी को किसानों का विश्वास हासिल करने के लिए बड़े फैसले लेने की जरूरत है। 
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अयाली ने झूंदा कमेटी की रिपोर्ट लागू होने तक पार्टी गतिविधियों से दूर रहने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल पंथ और पंजाब का सिरमौर संगठन है जिसका इतिहास बहुत सम्मानजनक रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से पार्टी नेताओं की ओर से लिए गए फैसलों के कारण अकाली दल में बड़ी वैचारिक गिरावट आई है। 
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इस वजह से 2017 के विधानसभा चुनाव से लेकर मौजूदा लोकसभा चुनाव तक ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशियों को जमानत जब्त होने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। राज्य में 10 साल तक लगातार शासन करने के बाद भी पार्टी लोगों की भावनाओं के विपरीत गलत फैसले लेती रही और राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी पार्टी की ओर से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में खड़े होकर गलत फैसला लिया गया। 

अयाली ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल के दो मजबूत घटक पंथ और किसान रहे हैं और जब केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का संघर्ष शुरू हुआ, तब भी पार्टी किसानों के मुद्दे पर सही समय पर फैसला नहीं ले सकी। 

 

उन्होंने कहा कि झूंदा कमेटी की सिफारिशें लागू न करने के विरोध में पिछले दो साल से पार्टी गतिविधियों से दूर रहे, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के एक वफादार सिपाही के तौर पर उन्होंने अकाली उम्मीदवार को जिताने के लिए कड़ी मेहनत की। लेकिन नतीजे सबके सामने हैं। 

 

अयाली मालवा से अकाली दल की विधानसभा सीट जीतने वाले एक मात्र सदस्य हैं और उस झूंदा कमेटी के भी सदस्य थे, जिसने 2022 में विधानसभा चुनावों के बाद अकाली दल की करारी हार के बाद गांव-गांव जाकर रिपोर्ट तैयार की थी। पूर्व सांसद परमजीत कौर गुलशन ने भी लीडरशिप के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए पार्टी से किनारा कर लिया है। 
 

2017 से घटती गई पार्टी की लोकप्रियता
दरअसल, पंजाब की सियासत कभी बादल परिवार के इर्द-गिर्द सिमटी रहती थी। हालांकि साल 2017 के बाद से पंजाब की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2017 के बाद से अकाली दल न केवल सत्ता से दूर है बल्कि विधायकों की संख्या भी घटकर अब इकाई अंक में पहुंच गई है।

भाजपा से गठबंधन टूटने और शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद पहला लोकसभा चुनाव हुआ, जिसमें अकाली दल एक ही सीट जीत पाया और 10 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। प्रकाश सिंह बादल की सियासी विरासत संभाल रहे सुखबीर सिंह बादल चुनाव नहीं लड़े लेकिन उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बठिंडा से चौथी बार चुनाव जीत गईं।

सुखबीर बादल ने लुधियाना में किया नेताओं संग मंथन
लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी में जान फूंकने के मकसद से शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को पार्टी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। बादल ने लुधियाना में चुनावों में पार्टी के उम्मीदवार रहे रंजीत सिंह ढिल्लों के यहां पहुंच कर मंथन किया। इस दौरान शिअद के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे। बादल ने सभी को लोकसभा चुनावों में उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देते हुए उनसे आगामी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। बादल ने कहा कि अकाली दल ही पंजाब और पंजाबियों के अधिकारों की रक्षा कर सकता है। ब्यूरो
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