{"_id":"666564c9a69369ef8d080a65","slug":"punjab-lok-sabha-election-result-2024-akali-dal-could-not-even-save-the-votes-it-got-in-assembly-elections-2024-06-09","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Election Result: विधानसभा चुनाव में मिले वोट भी बचा नहीं पाया अकाली दल, लगातार गिरता जा रहा है ग्राफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Election Result: विधानसभा चुनाव में मिले वोट भी बचा नहीं पाया अकाली दल, लगातार गिरता जा रहा है ग्राफ
Sun, 09 Jun 2024 02:21 PM IST
शाहरुख खान
विकास मल्होत्रा, अमर उजाला, लुधियाना
विकास मल्होत्रा, अमर उजाला, लुधियाना
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 09 Jun 2024 02:21 PM IST
सार
शिअद का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। पहले अकाली दल को शहरी इलाकों से मार पड़ती थी। अब ग्रामीण इलाकों में भी अकाली दल को मार पड़ने लगी है।
विज्ञापन
Punjab Lok Sabha Election
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब की सत्ता पर दस साल तक राज करने वाला शिरोमणि अकाली दल लगातार अपना वोट प्रतिशत खोता जा रहा है। 2017 से लगातार हार का सिलसिला जारी है और 2024 में तो शिरोमणि अकाली दल की हालत इस कद्र खराब हो चुकी है कि पार्टी को दो साल पहले पड़ी वोट भी हासिल नहीं हो पाई है।
महानगर के अकाली दल के प्रत्याशी रंजीत सिंह ढिल्लों की जमानत तक जब्त हो गई। शिअद का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। पहले अकाली दल को शहरी इलाकों से मार पड़ती थी। अब ग्रामीण इलाकों में भी अकाली दल को मार पड़ने लगी है।
महानगर की बात की जाए तो अकाली दल के प्रत्याशी घोषित विपन सूद काका ने पहले चुनाव लड़ने से मना करदिया और उसके बाद वह अकाली दल को अलविदा कह दोबारा से भाजपा में चले गए और उसके बाद गुरप्रीत सिंह बब्बल भी अकाली दल को छोड़ कर आप में चले गए।
विज्ञापन
चुनाव के बाद तो विरोध ओर भी बढ़ गया और अकाली दल के मालवा इलाके से इकलौते विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने सीधे तौर झूंदा कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर डाली और कह दिया कि तब तक वह पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।
विज्ञापन
महानगर के अकाली दल के प्रत्याशी रंजीत सिंह ढिल्लों की जमानत तक जब्त हो गई। शिअद का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। पहले अकाली दल को शहरी इलाकों से मार पड़ती थी। अब ग्रामीण इलाकों में भी अकाली दल को मार पड़ने लगी है।
विज्ञापन
महानगर की बात की जाए तो अकाली दल के प्रत्याशी घोषित विपन सूद काका ने पहले चुनाव लड़ने से मना करदिया और उसके बाद वह अकाली दल को अलविदा कह दोबारा से भाजपा में चले गए और उसके बाद गुरप्रीत सिंह बब्बल भी अकाली दल को छोड़ कर आप में चले गए।
विज्ञापन
चुनाव के बाद तो विरोध ओर भी बढ़ गया और अकाली दल के मालवा इलाके से इकलौते विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने सीधे तौर झूंदा कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर डाली और कह दिया कि तब तक वह पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।
2007 से लेकर 2017 तक अकाली दल ने दस साल तक राज किया और अच्छे मार्जिन के साथ जीत दर्ज की थी। 2017 में पार्टी की हार शुरु हुई जो 2022 में भी जारी रही और 2024 में तो अकाली दल का सूपड़ा ही साफ हो गया।
सौ साल पुरानी पार्टी के आज सिर्फ एक सांसद और दो विधायक बचे हैं। अकाली दल की तरफ नजर मारी जाए तो अकाली दल को 2022 विधानसभा चुनाव में नौ हलकों में 1.78 लाख 978 वोट मिले थे। मगर दो साल पहले प्राप्त किए वोट भी अकाली दल हासिल नहीं कर पाया।