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एक मूर्ख राजा, जिसकी मूर्खता से सभी को मिला स्वदेशी का संदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 27 Nov 2016 12:55 AM IST
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‘ग्लोबल राजा’ में दिया स्वदेशी का संदेश
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन में शनिवार को नाटक ग्लोबल राजा का मंचन किया गया। इसमें ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। नाटक का निर्देशन डॉक्टर योगेंद्र चौबे ने किया।
नाटक की कहानी एक ऐसे मूर्ख राजा पर आधारित थी, जो पोशाकों के अपने अलग से जुनून के कारण जाना जाता था। वह अपने राज में जनता की समस्याओं को सुलझाने की बजाए अपने अजीबोगरीब शौक को पूरा करने में जुटा रहता है। एक बार उसके दरबार में दो विदेशी आते हैं जो उसे ऐसी पोशाक दिखाते है जिसे सिर्फ समझदार इंसान ही देख सकता है। मूर्ख राजा उन विदेशियों की बातों में आ जाता है और उस पोशाक को खरीद लेता है।
यही नहीं उसे पहनकर अपनी पूरी नगरी का चक्कर लगाता है। उसके नौकर और मंत्री चापलूसी के कारण उसे सच्चाई नहीं बताते तब एक बच्चा राजा पर पानी फेंककर पोशाक की पूरी सच्चाई बताता है, तब राजा को अपनी गलती का अहसास होता है और जनता से माफी मांगता है।
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डायरेक्टर डॉक्टर योगेंद्र चौबे ने बताया कि इस नाटक के जरिए वह लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें स्वदेशी को अपनाना चाहिए। हम विदेशियों से इतने प्रभावित हैं कि हर चीज में उनके जैसा बनने को महानता समझते हैं। नाटक की कहानी भी यही दर्शाती है कि राजा को विदेशियों की बातों में न आकर अपने विवेक से अपने राज्य को आगे प्रमोट करना चाहिए था। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में धीरज सोनी, रविशंकर भारती, मोहित जैन, विवेक सोनी, गीतांजली और अतिशे ने भाग लिया।
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नाटक की कहानी एक ऐसे मूर्ख राजा पर आधारित थी, जो पोशाकों के अपने अलग से जुनून के कारण जाना जाता था। वह अपने राज में जनता की समस्याओं को सुलझाने की बजाए अपने अजीबोगरीब शौक को पूरा करने में जुटा रहता है। एक बार उसके दरबार में दो विदेशी आते हैं जो उसे ऐसी पोशाक दिखाते है जिसे सिर्फ समझदार इंसान ही देख सकता है। मूर्ख राजा उन विदेशियों की बातों में आ जाता है और उस पोशाक को खरीद लेता है।
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यही नहीं उसे पहनकर अपनी पूरी नगरी का चक्कर लगाता है। उसके नौकर और मंत्री चापलूसी के कारण उसे सच्चाई नहीं बताते तब एक बच्चा राजा पर पानी फेंककर पोशाक की पूरी सच्चाई बताता है, तब राजा को अपनी गलती का अहसास होता है और जनता से माफी मांगता है।
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डायरेक्टर डॉक्टर योगेंद्र चौबे ने बताया कि इस नाटक के जरिए वह लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें स्वदेशी को अपनाना चाहिए। हम विदेशियों से इतने प्रभावित हैं कि हर चीज में उनके जैसा बनने को महानता समझते हैं। नाटक की कहानी भी यही दर्शाती है कि राजा को विदेशियों की बातों में न आकर अपने विवेक से अपने राज्य को आगे प्रमोट करना चाहिए था। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में धीरज सोनी, रविशंकर भारती, मोहित जैन, विवेक सोनी, गीतांजली और अतिशे ने भाग लिया।