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जब सोने-चांदी ने कराया जेल तो सांप ने बचाई ब्राह्मण की जान...
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:40 PM IST
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जब सांप ने बचाई ब्राह्मण की जान
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन में चार दिवसीय चिल्ड्रन थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन मंगलवार को सच्चाई की जीत नाटक का मंचन हुआ, जिसमें पंचकूला के हंसराज पब्लिक स्कूल के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। नाटक का निर्देशन विजय कुमार ने किया।
नाटक की शुरुआत एक गरीब ब्राह्मण के घर के दृश्य से होती है, उसकी पत्नी उसे घर की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने की गुहार लगाती है और उसे शहर जाने के लिए कहती है। पैसे कमाने के उद्देश्य से ब्राह्मण अपना घर छोड़कर शहर की ओर चल पड़ता है। रास्ते में उसको कई जंगली जीव मिलते है। ब्राह्मण की इनसे दोस्ती हो जाती है। जब वह शहर पहुंचता है तो शहर की हालत उसे अपने गांव से भी गई-गुजरी लगती है और वहां उसे कोई रोजगार नहीं मिलता।
तब वह वापिस गांव आने का फैसला करता है। घर लौटते समय उसे रास्ते में वही जंगली जीव मिलते हैं जिनसे पहले उसकी दोस्ती हुई थी। वे ब्राह्मण को हीरे-जवाहरात तोहफे में देते हैं। ब्राह्मण ने सोचा कि वह इन हीरे-जवाहरात को बेचकर पैसे घर ले जाऊं। लेकिन, जब वो सुनार के पास जाता है तो सुनार उसे झूठे केस में फंसा देता है। इससे ब्राह्मण को कैद हो जाती है।
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कुछ समय बीतने के बाद एक दिन एक सांप रानी को काट (सर्पदंश) लेता है। इससे परेशान राजा को ब्राह्मण उपाय बताता है। इससे रानी की जान बच जाती है। ब्राह्मण के इस उपचार से खुश होकर राजा उसे अपनी कैद से मुक्त कर देता है और उसे धन-दौलत देकर मालामाल कर देता है। इस तरह नाटक में सांप ने बचाई ब्राह्मण की जान को कैद से छुड़ाया।
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नाटक की शुरुआत एक गरीब ब्राह्मण के घर के दृश्य से होती है, उसकी पत्नी उसे घर की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने की गुहार लगाती है और उसे शहर जाने के लिए कहती है। पैसे कमाने के उद्देश्य से ब्राह्मण अपना घर छोड़कर शहर की ओर चल पड़ता है। रास्ते में उसको कई जंगली जीव मिलते है। ब्राह्मण की इनसे दोस्ती हो जाती है। जब वह शहर पहुंचता है तो शहर की हालत उसे अपने गांव से भी गई-गुजरी लगती है और वहां उसे कोई रोजगार नहीं मिलता।
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तब वह वापिस गांव आने का फैसला करता है। घर लौटते समय उसे रास्ते में वही जंगली जीव मिलते हैं जिनसे पहले उसकी दोस्ती हुई थी। वे ब्राह्मण को हीरे-जवाहरात तोहफे में देते हैं। ब्राह्मण ने सोचा कि वह इन हीरे-जवाहरात को बेचकर पैसे घर ले जाऊं। लेकिन, जब वो सुनार के पास जाता है तो सुनार उसे झूठे केस में फंसा देता है। इससे ब्राह्मण को कैद हो जाती है।
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कुछ समय बीतने के बाद एक दिन एक सांप रानी को काट (सर्पदंश) लेता है। इससे परेशान राजा को ब्राह्मण उपाय बताता है। इससे रानी की जान बच जाती है। ब्राह्मण के इस उपचार से खुश होकर राजा उसे अपनी कैद से मुक्त कर देता है और उसे धन-दौलत देकर मालामाल कर देता है। इस तरह नाटक में सांप ने बचाई ब्राह्मण की जान को कैद से छुड़ाया।