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महाभारत के अंतिम दिनों में क्या हुआ, यह दिखाया गया ‘अंधा युग’ में
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 29 Nov 2016 12:52 AM IST
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नाटक अंधा युग से समाज में व्याप्त बुराइयों कों दर्शाया
- फोटो : अमर उजाला
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सत्ता होगी उनकी जिनकी पूंजी होगी और जिनके नकली चेहरे होंगे केवल उन्हें महत्व मिलेगा। सतयुग हो या कलयुग, धार्मिक भेद-भाव, महिलाओं के साथ ज्यादती, जाति-पाति यह सब हर युग में रहेंगे। जब तक समाज में आपसी प्यार, नैतिकता का बीज नहीं बोया जाएगा तब तक महाभारत चलता रहेगा। यह दृश्य पंजाब कला भवन में सोमवार को हुए नाटक ‘अंधा युग’ का है, जोकि महाभारत के अंतिम दिनों के बाद के समय पर आधारित था, जिसे तीसरे टीएफटी संस्कार भारती नाट्य समारोह के तहत गोरखपुर के थिएटर ग्रुप दर्पण के कलाकारों ने पेेश किया।
नाटक के निर्देशक दीप शर्मा ने बताया कि यह नाटक का 13 वां शो है, इससे पहले इस नाटक का मंचन दिल्ली, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में हो चुका है। उन्होंने बताया कि मूल रूप से इस प्ले की अवधि ढाई घंटे की है, लेकिन उन्होंने इसमें जरूरी दृश्य को शामिल कर डेढ़ घंटे में पेश किया है। वह बताते हैं कि इस नाटक के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि देश में महाभारत के समय जो हालात थे वह आज भी हैं। इन सब का कारण लोगों का अंधकार में जाना है।
नाटक की कहानी की बात करें तो इसमें दिखाया गया है कि युद्ध में किसी की भी जीत नहीं होती। जिसमें इंसानियत दम तोड़ देती है तब कैसे किसी को जीता कहा जा सकता है। नाटक की खासियत इसकी प्रस्तुति में थी जिसे कविता शैली में पेश किया गया।
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इन कलाकारों ने लिया भाग
डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में मानवेंद्र त्रिपाठी, नवनीत, रीना, संत श्रीवास्तव, शरद श्रीवास्तव, देवेज्य श्रीवास्तव, आकाश राय, अमित सिंह पटेल, अदित्य सिंह, दिनेश, जीतेंद्र पांडेय, अमित राय ने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। लाइटिंग पर अजीत राय थे।
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नाटक के निर्देशक दीप शर्मा ने बताया कि यह नाटक का 13 वां शो है, इससे पहले इस नाटक का मंचन दिल्ली, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में हो चुका है। उन्होंने बताया कि मूल रूप से इस प्ले की अवधि ढाई घंटे की है, लेकिन उन्होंने इसमें जरूरी दृश्य को शामिल कर डेढ़ घंटे में पेश किया है। वह बताते हैं कि इस नाटक के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि देश में महाभारत के समय जो हालात थे वह आज भी हैं। इन सब का कारण लोगों का अंधकार में जाना है।
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नाटक की कहानी की बात करें तो इसमें दिखाया गया है कि युद्ध में किसी की भी जीत नहीं होती। जिसमें इंसानियत दम तोड़ देती है तब कैसे किसी को जीता कहा जा सकता है। नाटक की खासियत इसकी प्रस्तुति में थी जिसे कविता शैली में पेश किया गया।
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इन कलाकारों ने लिया भाग
डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में मानवेंद्र त्रिपाठी, नवनीत, रीना, संत श्रीवास्तव, शरद श्रीवास्तव, देवेज्य श्रीवास्तव, आकाश राय, अमित सिंह पटेल, अदित्य सिंह, दिनेश, जीतेंद्र पांडेय, अमित राय ने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। लाइटिंग पर अजीत राय थे।