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आर्थिक संकट से जूझ रहा पंजाब: अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब मान सरकार बनाएगी नया रोड मैप

Mon, 14 Oct 2024 08:10 AM IST
निवेदिता वर्मा विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 14 Oct 2024 08:10 AM IST
सार

2019-20 में पंजाब सरकार पर करीब 2.29 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जोकि समय के साथ बढ़ता हुआ 3.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

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Punjab is facing economic crisis government will make new road map to strengthen economy
सीएम भगवंत मान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब सरकार ने 3.65 लाख करोड़ रुपये के कर्ज जाल में फंसे प्रदेश को बाहर निकालने के लिए नया कदम उठाया है। राजकोषीय घाटे को कम करने और लगातार सरकार पर बढ़ते कर्ज को नियंत्रित करने के लिए सरकार अब नया रोड मैप तैयार करने जा रही है, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।

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सरकार अपने नए रोड मैप पर डेढ़ महीने से काम कर रही है। सरकार ने अपने खर्च को नियंत्रण करने के साथ ही वित्तीय घाटे और फिजूलखर्ची को कम करना शुरू कर दिया है। अपने नए रोड मैप पर चलते हुए पंजाब सरकार ने पूर्व रिटायर्ड आईआरएस अरबिंद मोदी को मुख्य वित्तीय सलाहकार और ड्यूक यूनिवर्सिटी के पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर सेब्स्टेन जेम्स को वित्तीय सलाहकार नियुक्त किया है।
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पूर्व सरकारों ने भी पंजाब पर बढ़ते हुए वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कई फाइनेंशियल एडवाइजर अपॉइंट किए, लेकिन उनकी रिपोर्ट किसी भी सरकार में लागू नहीं की गई।

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सरकार पर सबसे बड़ी मार बिजली सब्सिडी की

प्रदेश की मौजूदा सरकार पर बिजली सब्सिडी की सबसे बड़ी मार पड़ रही है। प्रदेश में प्रत्येक कनेक्शन पर 300 यूनिट प्रति माह निशुल्क बिजली मुहैया कराने के अपने चुनावी वादे को सरकार बखूबी निभा रही है। इस पहलू का अगर दूसरा हिस्सा देखा जाए तो बिजली सब्सिडी पर सरकार का करीब 20 से 22 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहा है। सरकार ने अपने दूसरे चुनावी वादे प्रदेश की हर महिला को एक हजार रुपये आर्थिक मदद देने को अब तक पूरा नहीं किया है।

सरकार अब इस स्थिति में नहीं है कि इस वादे का पूरा कर सके, क्योंकि बीते दिनों पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा की अगुआई में हुई 16वें वित्तीय कमीशन की बैठक में भी बिजली सब्सिडी का विकल्प खोजने के लिए सरकार को कहा गया था, जोकि प्रदेश की मौजूदा सरकार का सत्ता में आने का सबसे बड़ा चुनाव वादा था।

सरकार ने घाटा कम करने के लिए उठाए ये कदम

बीते 5 सितंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में वित्तीय प्रबंधन को लेकर सरकार ने तैयार किए अपने नए रोड मैप पर काम करते हुए राजस्व को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया था, जिसका सीधा बोझ कहीं न कहीं जनता पर भी देखने को मिला है। तो कहीं अपने फिजूलखर्ची और घाटे को भी कम करने का प्रयास किया। इस दौरान सरकार ने पेट्रोल पर 61 पैसे और डीजल पर 92 पैसे प्रति लीटर वैट बढ़ाया था। इससे सरकार को 545 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व जुटाने की उम्मीद है।

इसी तरह सरकार ने 7 केवी तक के बिजली कनेक्शन पर दी जा रही सब्सिडी को बंद कर दिया, क्योंकि इससे कई लोगों को डबल सब्सिडी का लाभ मिल रहा था। इस फैसले से सरकार ने करीब एक हजार करोड़ रुपये की अपनी फिजूलखर्ची को बचाया है। इसी तरह सरकार ने बस के किराये में 23 से 48 पैसे प्रति किलोमीटर बढ़ाकर करीब 150 से 200 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व जुटाने का कदम उठाया है।

खर्च पर नियंत्रण करने का सरकार का नया कदम

अपने खर्च को नियंत्रण करने के लिए सरकार ने नया कदम उठाया है। इस संदर्भ में वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब सरकार के अधीन आने वाले सभी ऐसे विभागों की रिपोर्ट मांगी है, जो किसी प्राइवेट प्रॉपर्टी या बिल्डिंग में किराया देकर संचालित किए जा रहे हैं। दरअसल सरकार अपने सभी महकमे जो किराये पर चल रहे हैं, उन्हें अब सरकारी इमारतों में फिट कर किराये के रूप में करोड़ों रुपये की हो रही फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने जा रही है, जिससे सरकार को सालाना करीब 50 करोड़ रुपये तक बचने की उम्मीद है।

इस तरह सरकार पर बीते वर्षों में बढ़ता गया कर्ज

वित्तीय वर्ष                        कर्ज रुपये (करोड़ों में)
2019-20                         2,29,354
2020-21                         2,49,673
2021-22                         2,61,281
2022-23                         2,93,729
2023-24                         3,23,135
2024-25                         3,53,600

पंजाब के 8500 करोड़ केंद्र ने रोके

केंद्र ने पंजाब सरकार के करीब 8500 करोड़ रुपये अलग-अलग योजनाओं के तहत रोक रखे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) का 950 करोड़, आयुष्मान भारत योजना के तहत 249 करोड़, रूरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएफ) के तहत 5600 करोड़, मंडी बोर्ड के तहत 1100 करोड़, नेशनल हेल्थ मिशन के 1100 करोड़, समग्र शिक्षा अभियान के 180 करोड़ और कैपिटल क्रिएशन के तहत 1800 करोड़ रुपये के फंड रोक रखे हैं।

सरकार के राजस्व जुटाने के अपने सोर्स

सोर्स                         इतना राजस्व (रुपये करोड़ों में)
जीएसटी                         25,750 (44 प्रतिशत)
वैट                               8,550 (14 प्रतिशत)
स्टेट एक्साइज                  10350 (18 प्रतिशत)
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन            5,750 (10 प्रतिशत)
वाहनों पर टैक्स                 4,350 (7 प्रतिशत)
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