8वीं के छात्रों के लिए ऐसी सोच चौंका देगी आपको
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नशे के मुद्दे पर पंजाब सरकार अब तक असमंजस में है। एक ओर डिप्टी सीएम हमेशा यह दावा करते हैं कि पंजाब के लोग नशेड़ी नहीं, बस बदनाम ज्यादा हैं, तो दूसरी ओर सेहत मंत्री कहते हैं कि नशे के हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सभी स्कूलों में आठवीं कक्षा में दाखिले के वक्त डोप टेस्ट जरूरी किया जाना चाहिए।
चंडीगढ़ में सोमवार को सेहत विभाग के अधिकारियों से हुई बैठक में सेहत मंत्री सुरजीत सिंह ज्याणी ने आठवीं में दाखिले के वक्त बच्चों का डोप टेस्ट कराने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जल्द ही सेहत विभाग को टेस्ट किट जारी की जाएगी।
सेहत मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नशे में फंसे बच्चों को बाहर निकालने के लिए स्कूल स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए। इसलिए आठवीं कक्षा में प्रवेश के लिए अन्य प्रमाणपत्रों के साथ-साथ डोप टेस्ट प्रमाणपत्र देने भी अनिवार्य किया जा सकता है।
इलाज में होगी आसानी
सिविल अस्पताल पठानकोट की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सोनिया मिश्रा ने बताया कि सुझाव पर अमल हुआ तो बच्चे में प्राथमिक स्तर पर ही नशे की लत का पता चल जाएगा। इससे इलाज में आसानी होगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में ज्यादातर 12 से 19 वर्ष के बच्चे नशे का शिकार हो रहे हैं। डॉ. सोनिया ने बताया कि स्कूलों को शीघ्र ही डोप टेस्ट की किट भी मुहैया कराई जाएगी।
बैठक में स्कूलों में विद्यार्थियों को मिलिट्री ट्रेनिंग देने पर भी विचार-विमर्श किया गया ताकि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाया जा सके।
सभी का अपना-अपना राग
कम जानकारी रखने वाले कुछ नेताओं के बयानों के आधार पर पंजाब को नशे की समस्या में डूबे हुए राज्य के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। अफसोस की बात है कि आधी-अधूरी जानकारियों के बूते कुछ राष्ट्रीय नेता पंजाब के युवा को नशेड़ी बता रहे हैं। राज्य को बदनाम किया जा रहा है।
-सुखबीर सिंह बादल, डिप्टी सीएम, पंजाब
पंजाब में स्कूल ड्रग बेचने वालों का आसान शिकार बन रहे हैं। ड्रग पैडलर सरलता से छात्रा-छात्राओं को जाल में फंसा लेते हैं। यह जाना माना तथ्य है कि स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के बच्चों के पास ड्रग पाए जाते हैं। छात्र स्कूल कैंटीनों में बैठकर नशे के सौदे करते हैं। यह चिंता की बात है।
- सुरजीत ज्याणी, सेहत मंत्री पंजाब