Stubble burning: पंजाब में दो साल बाद सबसे कम जली पराली, मगर अमृतसर में सबसे अधिक मामले
2022 में 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पराली जलाने के कुल 1238 मामले दर्ज हैं। इस साल भी पराली जलाने के 561 मामलों के साथ अमृतसर पहले स्थान पर है। वहीं तरनतारन में 318 मामले सामने आए हैं।
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पंजाब में पराली के विरुद्ध चल रहे जागरूकता अभियान का असर दिखने लगा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2020 और 2021 के मुकाबले इस साल 2022 में 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। जहां साल 2020 में 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पराली जलाने के 4006 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2021 में 1946 और इस साल 2022 में इसी अवधि के दौरान पराली जलाने के 1238 मामले सामने आए हैं। यहां एक खास बात यह है कि इन तीनों वर्षों में पंजाब का अमृतसर जिला पराली जलाने के मामले में नंबर वन ही रहा, जबकि तरनतारन जिला दूसरे नंबर पर रहा।
2020 में मालेरकोटला में नहीं जली पराली
आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 में 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पूरे पंजाब में पराली जलाने के कुल 4006 मामले सामने सामने आए थे। इनमें से अकेले 1268 मामले अमृतसर के थे जबकि दूसरे नंबर पर तरनतारन में 951, बरनाला में 19, बठिंडा में 54, फतेहगढ़ साहिब में 81, फरीदकोट में 98, फाजिल्का में 37, फिरोजपुर में 219, गुरदासपुर में 244, होशियारपुर में 33, जालंधर में 88, कपूरथला में 131, लुधियाना में 108, मानसा में 45, मोगा में 29, मुक्तसर में 20, एसबीएस नगर में 16, पठानकोट में 0, पटियाला में 378, रूपनगर में 14, एसएएस नगर में 68, संगरूर में 105 व मालेरकोटला में कोई पराली जलाने का मामला सामने नहीं आया था।
2021 में यह है जिलेवार पराली जलाने का आकंड़ा
2021 में पंजाब में पराली जलाने के कुल मामले 1946 दर्ज हैं। इनमें अमृतसर जिले में ही सबसे अधिक 532 और दूसरे स्थान पर तरनतारन में 472 पराली जलाने के मामले सामने आए थे। बाकी के जिलों में बरनाला में 11, बठिंडा में 5, फतेहगढ़ साहिब में 92, फरीदकोट में 57, फाजिल्का में 24, फिरोजपुर में 61, गुरदासपुर में 104, होशियारपुर में 10, जालंधर में 62, कपूरथला में 74, लुधियाना में 121, मानसा में 1, मोगा में 33, मुक्तसर में 14, एसबीएस नगर में 7, पठानकोट में 0, पटियाला में 192, रूपनगर में 10, एसएएस नगर में 26, संगरूर में 31 व मालेरकोटला में 7 पराली जलाने के मामले दर्ज हैं।
इस साल अभी तक कम जली पराली
इस साल 2022 में 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पराली जलाने के कुल 1238 मामले दर्ज हैं। इस साल भी पराली जलाने के 561 मामलों के साथ अमृतसर पहले स्थान पर है। वहीं तरनतारन में 318 मामले सामने आए हैं। इनके अलावा बरनाला में सात, बठिंडा में 1, फतेहगढ़ साहिब में 11, फरीदकोट में 6, फाजिल्का में पांच, फिरोजपुर में 47, गुरदासपुर में 61, होशियारपुर में 1, जालंधर में 40, कपूरथला में 62, लुधियाना में 19, मानसा में 3, मोगा में 21, मुक्तसर में 1, एसबीएस नगर में 2, पठानकोट में कोई मामला नहीं, पटियाला में 40, रूपनगर में कोई मामला नहीं, एसएएस नगर में 5, संगरूर में 23 व मालेरकोटला में पराली जलाने के चार मामले दर्ज हुए हैं।
जागरूकता के साथ किसानों को अधिक संख्या में मिली पराली प्रबंधन की मशीनरी: चेयरमैन
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के चेयरमैन डॉ. आदर्शपाल विंग इसे विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयासों की सफलता बताते हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस साल सरकार की तरफ किसानों को पराली के प्रबंधन के लिए जरूरी खेतीबाड़ी मशीनरी अधिक संख्या में मुहैया कराई गई है। साथ ही पहले की तुलना में किसानों में पराली जलाने से पर्यावरण के साथ-साथ उनके खेतों की उपजाऊ शक्ति को होने वाले नुकसानों को लेकर जागरूकता भी आई है। पराली प्रबंधन की मशीनरी में शोध की मदद से कई सुधार भी किए गए हैं, जिससे भी किसानों को फायदा हुआ है।
खराब होती है दिल्ली की आबोहवा
पराली के धुएं की वजह से हर साल दिल्ली की आबोहवा भी प्रदूषित होती है। सर्दियों के मौसम में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। हाल ही में केंद्र सरकार ने पंजाब, हरियाणा व यूपी को पराली जलाने के मामलों में बड़ी कमी लाने की हिदायतें भी जारी की हैं। खास तौर से पंजाब को दिल्ली में सर्दी के मौसम में बढ़े प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।