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Chandigarh News: मिट्टी के बर्तनों को आकार देने से कम होगा तनाव

Wed, 07 Oct 2026 02:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 02:11 AM IST
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Shaping clay pots will reduce stress.
पीजीआई मनोरोग विभाग की पहल, पॉटरी और स्कल्पचर से मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के साथ आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
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समर्थ-शेपिंग क्ले, नर्चरिंग माइंड के तहत मरीजों और परिजनों को कौशल प्रशिक्षण व रोजगार के अवसरों से जोड़ने की तैयारी
चंडीगढ़। मानसिक तनाव और भावनात्मक परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए मिट्टी को आकार देना राहत का जरिया बन सकता है। पीजीआई के मनोरोग विभाग ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में दवा और काउंसलिंग के साथ पॉटरी और स्कल्पचर जैसी रचनात्मक गतिविधियों को जोड़ने की पहल की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मिट्टी से बर्तन और दूसरी कलाकृतियां बनाने की प्रक्रिया व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाने और उसका ध्यान तनाव से हटाकर रचनात्मक काम पर केंद्रित करने में मदद कर सकती है।
इस पहल को ‘समर्थ-शेपिंग क्ले, नर्चरिंग माइंड’ नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी और उपचार तक सीमित न रखते हुए व्यक्ति के आत्मविश्वास, कौशल, सामाजिक जुड़ाव और रोजगार की संभावनाओं से भी जोड़ना है। इस पहल में पीजीआई के मनोरोग विभाग के साथ चंडीगढ़ स्किल डेवलपमेंट मिशन (सीएसडीएम), नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) और चंडीगढ़ ललित कला अकादमी जुड़े हैं।
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मनोरोग विभाग के डॉ. राहुल और डॉ. स्वप्नजीत साहू ने बताया कि पहल के तहत मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों और उनके परिजनों को उपयुक्त कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण में बदलाव और काम के दौरान सहयोग देने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
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रचनात्मकता से आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास
डॉ. राहुल ने बताया कि मिट्टी के साथ काम करने के दौरान हाथ, आंख, दिमाग और रचनात्मक सोच एक साथ सक्रिय होते हैं। इसी वजह से पॉटरी और स्कल्पचर को मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने वाली गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका मकसद केवल कुछ समय के लिए मन बहलाना नहीं, बल्कि रचनात्मकता के जरिए आत्मविश्वास बढ़ाकर व्यक्ति को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाना है।
इस पहल में पीजीआई मनोरोग विभाग की टीम शामिल है। इसमें विभागाध्यक्ष प्रो. शुभो चक्रवर्ती, एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रेनजित, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वप्नजीत साहू, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राहुल चक्रवर्ती और वोकेशनल गाइडेंस इंस्ट्रक्टर डॉ. रमा मल्होत्रा शामिल हैं।

9 अक्तूबर को होगी कार्यशाला और प्रतियोगिता
पीजीआई के नशामुक्ति केंद्र में 9 अक्तूबर को समर्थ पहल के तहत इन्क्लूसिव पॉटरी वर्कशॉप-कम-कॉम्पिटिशन आयोजित होगा। इसमें पीजीआई के मरीज, डॉक्टर और छात्र, साथ ही अन्य संस्थानों के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।
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