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Chandigarh News: फैकल्टी बार-बार बदली तो लौटानी होगी पूरी फीस, जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का आदेश
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जिला उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना, छात्रा को 55 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज समेत लौटाने के निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। आईएएस बनने की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने वाली छात्रा को वादा की गई नियमित और अनुभवी फैकल्टी नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने प्लूटस आईएएस अकादमी को पूरी फीस लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने संस्थान की सेवाओं में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। छात्रा को 55 हजार रुपये की फीस 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत लौटाने के अलावा मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 15 हजार रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के आदेश के अनुसार छात्रा ने 29 जुलाई 2024 को चंडीगढ़ शाखा में यूपीएससी की तैयारी के लिए 55 हजार रुपये जमा किए थे। छात्रा का आरोप था कि दाखिले के समय संस्थान ने अनुभवी, योग्य और स्थायी शिक्षकों से पढ़ाई कराने का भरोसा दिया था। हालांकि कक्षाएं शुरू होने के बाद शिक्षकों को लगातार बदला जाता रहा। कई बार उसकी कक्षाएं दूसरे बैचों के साथ मर्ज कर दी गईं। इससे पढ़ाई की निरंतरता प्रभावित हुई।
14 विद्यार्थियों ने मांगी फीस वापसी
लगातार फैकल्टी बदलने और कक्षाओं के मर्ज होने से परेशान छात्रा समेत 14 विद्यार्थियों ने 22 अक्तूबर 2024 को संस्थान से सामूहिक रूप से फीस वापस करने की मांग की। इसके बाद संस्थान ने शुरुआत में 15 हजार रुपये काटकर 40 हजार रुपये लौटाने की बात कही। बाद में संस्थान की ओर से रजिस्ट्रेशन, पोर्टल एक्सेस, स्टडी मटीरियल और ऑफलाइन चार्ज के नाम पर 45 हजार रुपये काटकर केवल 10 हजार रुपये लौटाने का प्रस्ताव दिया गया। विद्यार्थियों ने इसका विरोध किया। विवाद का समाधान नहीं होने पर मामला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मोहाली पहुंचा।
पूरी फीस ब्याज समेत लौटाने के आदेश
सुनवाई के दौरान आयोग ने संस्थान की ओर से विद्यार्थियों को दी जाने वाली सेवाओं और दाखिले के समय किए गए वादों को ध्यान में रखा। आयोग ने माना कि संस्थान की जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को वादे के अनुरूप गुणवत्ता और निरंतरता वाली सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। आयोग ने छात्रा से ली गई 55 हजार रुपये की पूरी फीस 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 15 हजार रुपये अलग से देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने दोनों संबंधित संस्थानों को आदेश के पालन के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। आईएएस बनने की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने वाली छात्रा को वादा की गई नियमित और अनुभवी फैकल्टी नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने प्लूटस आईएएस अकादमी को पूरी फीस लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने संस्थान की सेवाओं में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। छात्रा को 55 हजार रुपये की फीस 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत लौटाने के अलावा मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 15 हजार रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के आदेश के अनुसार छात्रा ने 29 जुलाई 2024 को चंडीगढ़ शाखा में यूपीएससी की तैयारी के लिए 55 हजार रुपये जमा किए थे। छात्रा का आरोप था कि दाखिले के समय संस्थान ने अनुभवी, योग्य और स्थायी शिक्षकों से पढ़ाई कराने का भरोसा दिया था। हालांकि कक्षाएं शुरू होने के बाद शिक्षकों को लगातार बदला जाता रहा। कई बार उसकी कक्षाएं दूसरे बैचों के साथ मर्ज कर दी गईं। इससे पढ़ाई की निरंतरता प्रभावित हुई।
14 विद्यार्थियों ने मांगी फीस वापसी
लगातार फैकल्टी बदलने और कक्षाओं के मर्ज होने से परेशान छात्रा समेत 14 विद्यार्थियों ने 22 अक्तूबर 2024 को संस्थान से सामूहिक रूप से फीस वापस करने की मांग की। इसके बाद संस्थान ने शुरुआत में 15 हजार रुपये काटकर 40 हजार रुपये लौटाने की बात कही। बाद में संस्थान की ओर से रजिस्ट्रेशन, पोर्टल एक्सेस, स्टडी मटीरियल और ऑफलाइन चार्ज के नाम पर 45 हजार रुपये काटकर केवल 10 हजार रुपये लौटाने का प्रस्ताव दिया गया। विद्यार्थियों ने इसका विरोध किया। विवाद का समाधान नहीं होने पर मामला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मोहाली पहुंचा।
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पूरी फीस ब्याज समेत लौटाने के आदेश
सुनवाई के दौरान आयोग ने संस्थान की ओर से विद्यार्थियों को दी जाने वाली सेवाओं और दाखिले के समय किए गए वादों को ध्यान में रखा। आयोग ने माना कि संस्थान की जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को वादे के अनुरूप गुणवत्ता और निरंतरता वाली सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। आयोग ने छात्रा से ली गई 55 हजार रुपये की पूरी फीस 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 15 हजार रुपये अलग से देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने दोनों संबंधित संस्थानों को आदेश के पालन के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
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