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Highcourt: हर 10 साल में आरक्षण की समीक्षा न होने पर HC ने हरियाणा सरकार और NCBC से मांगा जवाब

Thu, 29 Jun 2023 11:23 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 29 Jun 2023 11:23 AM IST
सार

हरियाणा में आरक्षण के लिए मंडल कमिशन की रिपोर्ट को 1995 में अपनाया गया और इस रिपोर्ट के आधार पर शेड्यूल ए और बी तैयार किया गया था। इस रिपोर्ट में भी यह कहा गया था कि 20 वर्षों में पिछड़े वर्ग को दिए गए आरक्षण की समीक्षा की जाए।  

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Punjab-Haryana sought answer from haryana govt and NCBC on petition not reviewing reservation
highcourt

विस्तार

राजनीति के लिए आरक्षण का इस्तेमाल और मंडल कमिशन की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए आरक्षण को रिव्यू न करने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व नेशनल कमिशन फॉर बैकवर्ड क्लास (एनसीबीसी) से जवाब मांगा है। 

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स्नेहांचल चैरिटेबल ट्रस्ट ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया था कि एनसीबीसी की गाइड लाइन के अनुसार तथा इंदिरा साहनी और राम सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि आरक्षण की हर 10 साल में समीक्षा होनी चाहिए। बावजूद इसके आज तक समीक्षा नहीं हुई है। भारत में आजादी के बाद जब संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया तब से लेकर अब तक राजनीति के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है। वोट बैंक के लिए आरक्षण पाने वाली जातियों की संख्या में बढ़ोत्तरी तो कर दी जाती है परंतु किसी जाति को इससे बाहर नहीं किया जाता है। याची ने कहा कि आरक्षण लागू करते हुए हर 10 वर्ष में इसे रिव्यू करने का प्रावधान रखा गया था परंतु यह कार्य किसी ने भी नहीं किया।
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हर दस साल में आरक्षण की समीक्षा करने का है एक्ट में प्रावधान
हरियाणा में आरक्षण के लिए मंडल कमिशन की रिपोर्ट को 1995 में अपनाया गया और इस रिपोर्ट के आधार पर शेड्यूल ए और बी तैयार किया गया था। इस रिपोर्ट में भी यह कहा गया था कि 20 वर्षों में पिछड़े वर्ग को दिए गए आरक्षण की समीक्षा की जाए। याची ने कहा कि इस आयोग की रिपोर्ट को 15 साल बाद 1995 में अपनाया गया था और ऐसे में 2000 में इसकी समीक्षा होनी चाहिए थी। परंतु 2017 तक 37 साल बीत गए हैं लेकिन किसी भी स्तर पर समीक्षा का प्रयास नहीं किया गया। 


याची ने कहा कि एनसीबीसी और सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में आरक्षण व्यवस्था के लिए आंकड़े एकत्रित करने और समीक्षा करने के लिए पूरा प्रक्रिया को स्पष्ट किया है, लेकिन राजनीतिक दलों ने हित साधने के लिए इसे अपनाया ही नहीं। 1993 में कंबोज कमिशन बनाया गया तो वहीं 1999 में गुरनाम सिंह कमिशन बनाया गया। इन सभी में कुछ जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की बात तो कही गई परंतु आंकड़ों के आधार पर किसी को बाहर करने की बात नहीं कही गई। याची ने कहा कि 1951 से लेकर अभी तक केवल जातियों को शामिल ही किया गया है। 

हाईकोर्ट ने इसपर याची से पूछा था कि इस बारे में क्या किया जा सकता है। याची ने कहा कि नए सिरे से आंकड़े एकत्रित करते हुए यह देखा जाना चाहिए किस जाति को आरक्षण की जरूरत है और किसे नहीं। यह प्रक्रिया हर दस साल में अपनाई जानी चाहिए। याची ने उदाहरण के माध्यम से कहा कि 1951 से 71 जातियों को पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण लाभ प्राप्त है और क्या अभी तक इन में से कोई एक जाति भी आगे नहीं बढ़ पाई है।

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