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रिंग रोड प्रोजेक्ट लटका, पंजाब-चंडीगढ़ ने खड़े किए हाथ, गवर्नर ने लिखा पत्र- अब केंद्र बनवाए

Tue, 29 Oct 2019 11:40 AM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 29 Oct 2019 11:40 AM IST
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Punjab haryana refused to make ring roads in chandigarh
रिंग रोड - फोटो : Demo Pic
ट्राइसिटी में ट्रैफिक जाम की समस्या से छुटकारे के लिए आउटर रिंग रोड बनाने के प्रस्ताव पर चंडीगढ़ और पंजाब ने हाथ खड़े कर दिए हैं। यूटी के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इस बारे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट को पूरा करने की मांग की है। चंडीगढ़ प्रशासन चाहता है कि इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार अपने हाथ में लेकर पूरा कराए।
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पंजाब और चंडीगढ़ के इस लेटर के बाद आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट फिर से लटक गया है। जानकारी के अनुसार, आउटर रिंग रोड की कुल लंबाई करीब 100 किलोमीटर है। सरकार को इसके लिए 1500 एकड़ के करीब भूमि अधिग्रहण करनी होगी। रिंग रोड का 85 प्रतिशत हिस्सा पंजाब में होगा और बाकी का हिस्सा हरियाणा में होगा।
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इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत हजारों करोड़ में है, इसलिए पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इसे केंद्रीय प्रोजेक्ट के तहत बनाने की मांग की है। बदनौर की तरफ से इस बारे में एक पत्र कुछ दिनों पहले केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भेजा गया है। हालांकि केंद्र की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं आया है।
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गौरतलब है कि चंडीगढ़ में हर दो महीने में करीब दस हजार नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं। इतना ही नहीं पंजाब, हरियाणा और हिमाचल से भी काफी संख्या में वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। बाहरी ट्रैफिक पर कंट्रोल करने के लिए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा मंजूर कर दिया गया था लेकिन फंड, भूमि अधिग्रहण और हिस्सेदारी को लेकर मामला अभी तक लटका हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने भी उठा था मुद्दा

आउटर रिंग रोड को लेकर 20 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई 29वीं नॉर्दर्न जोनल काउंसिल मीटिंग में भी चर्चा की गई थी। रिंग रोड के लिए जमीन देने के विवाद पर हरियाणा सरकार ने अमित शाह के सामने मुद्दा उठाया था, जिसके बाद पंजाब ने हामी भरी थी। साथ ही मोहाली में इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पंचकूला के सेक्टर 20-21 तक बनने वाली रिंग रोड पीआर 7 के निर्माण के लिए भी पंजाब ने सहमति जताई थी।

ट्राइसिटी को इसलिए रिंग रोड की जरूरत
चंडीगढ़ को एक से डेढ़ लाख लोगों के रहने के लिए बसाया गया था, लेकिन अब सिटी की आबादी 12 लाख तक पहुंच चुकी है। जनसंख्या बढ़ने के साथ ही शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं, पड़ोसी राज्यों से रोजाना करीब डेढ़ लाख से अधिक छोटे व बड़े वाहन सिटी में प्रवेश कर इस दबाव को और बढ़ा रहे हैं।

नतीजतन शहर और बाहरी वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते शहर की सड़कें कराह उठी हैं। ट्रिब्यून चौक, हल्लोमाजरा चौक समेत शहर के कई अन्य चौक-चौराहे जाम की गिरफ्त में रहते हैं। खासकर सुबह और शाम को वाहन चालकों को जाम का झाम झेलना पड़ता है। यही वजह है कि बीते दो साल से चंडीगढ़ में रिंग रोड बनाने की मांग चल रही है।

रिंग रोड बनने पर ऐसे दौड़ेंगे वाहन

- खरड़ से आने वाले वाहन चंडीगढ़ नहीं आएंगे। ये वाहन खरड़ से सीधे मोहाली और फिर पंजाब के दूसरे शहरों में जा सकेंगे।
- जालंधर की ओर से आने वाला ट्रैफिक मुल्लांपुर-बद्दी-नालागढ़ होकर हिमाचल की ओर निकल जाएगा।
- अभी मोहाली से दिल्ली की ओर जाने वाला ट्रैफिक चंडीगढ़ होकर गुजरता है। रिंग रोड बनने के बाद दिल्ली जाने वाले वाहनों का दबाव सिटी में कम हो जाएगा।
- रिंग रोड बनने के बाद खरड़ से मोहाली और फिर पंजाब के दूसरे शहरों में आसानी से पहुंचा जा सकेगा। इसके लिए चंडीगढ़ आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- चंडीगढ़ आने के लिए मोहाली की ओर से ही करीब 9 एंट्रेंस हैं। हरियाणा की तरफ से भी दक्षिण मार्ग और मध्य मार्ग मुख्य एंट्रेंस हैं, जिनसे रोजाना हजारों वाहन शहर में दाखिल होते हैं। रिंग रोड बनने के बाद यह दबाव सिटी में कम हो जाएगा।

आउटर रिंग रोड का प्रोजेक्ट काफी बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें 100 किलोमीटर के करीब सड़क बनानी है। बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण किया जाना है। इसलिए इसको केंद्रीय प्रोजेक्ट के तौर पर शामिल करने के लिए यूटी प्रशासक ने केंद्रीय मंत्री को लिखा है।
- एके सिन्हा, फाइनेंस सेक्रेटरी, यूटी
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