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आपकी जेब में रखा मोबाइल जानलेवा तो नहीं, जांच करेगी हाईकोर्ट

Thu, 30 Nov 2017 03:31 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 30 Nov 2017 03:31 PM IST
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punjab haryana highcourt will test radiation of mobile phones
मोबाइल यूजर
मोबाइल फोन भी रेडिएशन छोड़ते हैं। यदि टावर की रेडिएशन खतरनाक है तो मोबाइल की रेडिएशन और अधिक खतरनाक हो सकती है। यह टिप्पणी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस अमित रावल की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की। पीआईएल बेंच ने याचिकाकर्ता को मेडिकल रिपोर्ट और स्टडी पेश करने के आदेश दिए हैं। इसमें मोबाइल फोन और टावरों की रेडिएशन के इंसानी शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को बताया गया हो।
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ऐसे में अब हाईकोर्ट जांचेगा कि कहीं आपकी जेब में पड़ा फोन जानलेवा तो नहीं है। टावर की रेडिएशन को लोगों के लिए खतरनाक बताते हुए इसे रिहायशी इलाकों से बाहर लगाने की अपील वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ा दिया है। अनुराधा साबो ने सीनियर एडवोकेट मनीषा गांधी के माध्यम से  याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ में मोबाइल टावरों को रिहायशी इलाकों को लगाने की अनुमति देने को चुनौती दी थी।
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याचिका में कहा गया था कि मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडिएशन बहुत खतरनाक होती है और इसका सीधा असर न केवल मानव शरीर अपितु पशुओं पर भी होता है। हाईकोर्ट इस मामले में सुनवाई कर ही रहा था कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब मोबाइल टावर इतना नुकसान पहुंचा सकता हैं तो फोन का कितना अधिक प्रभाव होगा। कोर्ट ने कहा कि यह देखा जाना बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि मोबाइल आज हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन गया है और लगभग 24 घंटे साथ रहता है।
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ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को ऐसी स्टडी और मेडिकल रिपोर्ट लाने के आदेश दिए हैं, जिससे मोबाइल फोन से पड़ने वाले प्रभावों को देखा जा सके। कोर्ट ने कहा कि भले ही मोबाइल फोन एक बड़ी सुविधा है लेकिन स्वास्थ्य की कीमत पर कोई सुविधा नहीं हो सकती है।


रेडिएशन से बचने के लिए कितनी कारगर हैं ऑप्टिकल फाइबर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि आज के समय में केवल टावरों से ही नहीं बल्कि अन्य माध्यमों से भी दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकती है। ऑप्टिकल फाइबर इनमें से एक है। ऐसे में यदि दूरसंचार कंपनियां इसका इस्तेमाल करें तो एक ओर तो सिग्नल मजबूत होंगे और दूसरी ओर रेडिएशन भी कम होगा। अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर बहस होगी।
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