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धर्मग्रंथों के अनवादों के सही या गलत होने पर हाईकोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी, जानिए क्या?

Sun, 12 Feb 2017 01:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 12 Feb 2017 01:27 PM IST
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punjab haryana highcourt statement on right or wrongs of holy books tanslations
कोर्ट
विख्यात स्कॉलर भाई कान्ह सिंह नाभा द्वारा 1930 में लिखे गए गुरुशब्द रत्नाकर महाकोष के अनुवाद को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की।
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हाईकोर्ट ने कहा कि हम कानूनविद धर्म ग्रंथों के अनुवाद के प्रश्न का जवाब कैसे दे सकते हैं। यह कार्य शिक्षाविदों का है। यदि इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया गया तो आज महाकोष है, कल गीता होगी और परसों कुछ और। कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए एक्सपर्ट बॉडी ही सही विकल्प है।
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मामले में याची ने अपना पक्ष रखने के लिए समय दिए जाने की अपील की जिसपर हाईकोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला की ओर से महाकोष का हिंदी व अंग्रेजी में अनुवाद त्रुटियों के चलते बीते दिनों विवाद में आ गया।
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याचिका में ये दलील दी गई थी

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कोर्ट
मामले में याचिका दाखिल करते हुए राजेंद्र सिंह व अन्य ने एडवोकेट रमनदीप सिंह पंढेर के माध्यम से हाईकोर्ट के सामने अनुवाद से जुड़ा मुद्दा रखा। याची ने कहा कि पंजाब और पंजाबी की शैक्षणिक, सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत महान कोष है।

इस कोष को 1930 में विख्यात स्कॉलर भाई कान्ह सिंह नाभा की ओर से तैयार किया गया था। पंजाबी यूनिवर्सिटी ने इस महान कोष के हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद का फैसला लेने के साथ ही पंजाबी वर्जन को दोबारा तैयार करने की बात कही थी।

याची ने जनहित याचिका के माध्यम से अनुवाद में हुई गलतियों को कोर्ट के सामने रखा। याची ने कहा कि पंजाब और पंजाबी के रेफरेंस के लिए सबसे विश्वसनीय यह कोष है। यदि इस कोष को इस प्रकार विकृत होने दिया गया तो ऐसे में विरासत मिट जाएगी। इसकी बिक्री रोकने की और इसकी जांच के लिए पैनल गठित करने की अपील की है।
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