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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana Highcourt Statement on Restigation of Lady Judge

केवल आरोप के आधार पर किसी न्यायाधिकारी को बलि का बकरा बनने नहीं दे सकते: हाईकोर्ट

Tue, 30 Oct 2018 10:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 30 Oct 2018 10:16 AM IST
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Punjab Haryana Highcourt Statement on Restigation of Lady Judge
court
एक वैवाहिक विवाद से पैदा हुए आरोप को आधार बनाकर एक महिला जज को बर्खास्त करना न्याय की दृष्टि में उचित नहीं है। केवल आरोप के आधार पर एक महिला जज की सेवाएं बर्खास्त करना उसे बलि का बकरा बनाना है और ऐसे में इस तरह के आदेश कानून की दृष्टि में नहीं टिकते। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एबी चौधरी पर आधारित खंडपीठ ने बर्खास्त जज को सेवा में बहाल करने के आदेश में यह टिप्पणी की है। बर्खास्त महिला जज ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए प्रशासनिक स्तर पर आयोजित फुल कोर्ट में लिए गए उसकी बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती दी थी।
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याची ने कहा कि फरीदकोट के एक जज की पत्नी ने उसके खिलाफ शिकायत दी थी और शिकायत में याची का नाम तक नहीं था। इस शिकायत को आधार बनाते हुए याची से जवाब तलब कर लिया गया। याची ने हाईकोर्ट में रिप्रेजेंटेशन दी लेकिन 17 दिसंबर 2009 को उसकी बर्खास्तगी के आदेश थमा दिए गए। हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि फुल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए गलती की है। याची जो जिला जज कपूरथला के आधीन काम करती थी उनसे रिपोर्ट नहीं मांगी गई और फरीदकोट के जिला जज ने याची के खिलाफ रिपोर्ट दी जबकि याची उनके आधीन नहीं थी।
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हाईकोर्ट को चाहिए था कि वह जिला जज कपूरथला से रिपोर्ट मांगते। कोर्ट ने तत्कालीन जिला जज द्वारा याची के खिलाफ सौंपी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए। आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि कैसे केवल आरोप के आधार पर एक महिला जज के बारे में इस प्रकार की रिपोर्ट तैयार की जा सकती है जो उसका कैरियर और जीवन बर्बाद करने वाली हो। कोर्ट ने कहा कि जिस जज के साथ याची के रिश्ते का आरोप लगाया गया उनका वैवाहिक विवाद निपट चुका है और याची बलि का बकरा बनी है। कोर्ट ने कहा कि महिला जज के साथ अन्याय नहीं होने दिया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फुल कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए याची को सेवा में बहाल करने के आदेश दिए हैं।
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