हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब: मां-बाप के तलाक में न पिसे बचपन, इसके लिए साझा पालन पोषण पर कदम उठाए सरकार
हाईकोर्ट ने कहा कि अकेले चंडीगढ़ में घरेलू विवाद के 1700 मामले लंबित हैं। अन्य स्थानों पर भी समस्या कुछ इसी प्रकार की है। इस प्रकार के मामलों में मध्यस्थता एक विकल्प हो सकता है।
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दंपती के आपसी विवाद और अलग होने से बच्चों का बचपन न पिसे और उन्हें मां और पिता दोनों का प्यार मिले, इसके लिए साझा पालन पोषण की व्यवस्था को अमल में लाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।
मामला गुरदासपुर का है जिसमें पिता को बेटी से मिलने के लिए हर शुक्रवार का समय देने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में बच्चों के दोनों अभिभावकों के प्यार का अधिकार छिनने को आधार बनाया और याचिका का दायरा बढ़ाते हुए केंद्र सरकार से इस बारे में जवाब तलब किया।
बच्चों की साइकोलॉजी समझना मुश्किल
केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि इस दिशा में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से राय मांगी गई है। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि अकेले चंडीगढ़ में घरेलू विवाद के 1700 मामले लंबित हैं। अन्य स्थानों पर भी समस्या कुछ इसी प्रकार की है। इस प्रकार के मामलों में मध्यस्थता एक विकल्प हो सकता है। लेकिन न तो अदालतें और न ही मध्यस्थ इतने सक्षम हैं कि वह बच्चे की साइकोलॉजी को समझ सकें। ऐसे में साझा पालन- पोषण एक ऐसा विकल्प हो सकता है जिससे बच्चे को दोनों अभिभावकों का प्यार मिल सके और अभिभावकों को भी सालों तक कोर्ट के चक्कर न काटने पड़े।
अब हाईकोर्ट ने साझा पालन पोषण पर अगली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही एडवोकेट दिव्या शर्मा से निवेदन किया कि वह अगली सुनवाई पर यह बताएं कि इस व्यवस्था के लिए किन संसाधनों की आवश्यकता पड़ेगी।