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बुरी खबरः हरियाणा में सवा लाख से अधिक कच्चे कर्मी अब मात्र 6 माह के मेहमान

Fri, 01 Jun 2018 11:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 01 Jun 2018 11:01 AM IST
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punjab haryana highcourt rejected haryana government regularisation policy
haryana cm khattar - फोटो : अमर उजाला
बहुत बुरी खबर, हरियाणा में विभिन्न विभागों, निकायों व अन्य कार्यालयों में कार्यरत करीब सवा लाख कर्मचारियों की नौकरी जाना तय है। हाईकोर्ट ने इन सभी को 6 माह काम करने की छूट देते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि इस अवधि में रेगुलर कर्मचारियों की नियुक्तियां करें।
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छह माह के बाद हरियाणा में एक भी कच्चा कर्मचारी नहीं होना चाहिए। हरियाणा में विधान सभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस सरकार द्वारा कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक एवं अस्थायी तौर पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने के लिए बनाई गई रेगुलराइजेशन पॉलिसी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
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हाईकोर्ट के आदेश के चलते हजारों कर्मियों की नौकरी पर बन आई है जिन्हें इस पॉलिसी से रेगुलर किया गया था। हाईकोर्ट ने सरकार को इन पदों पर नियमित नियुक्तियां करने के आदेश दिए हैं। हालांकि कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक एवं अस्थायी तौर कार्यरत कर्मियों को 6 माह तक कार्यरत रहने की छूट के साथ ही नई नियुक्तियों में इन्हें आयु की छूट देने के आदेश दिए हैं।
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जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की खंडपीठ ने शक्रवार को इन नियुक्तियों के खिलाफ दायर दर्जनों याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा है कि इन कर्मियों को नियमित करने से सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2006 में उमा देवी के मामले में तय किये गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट अपने आदेशों में कह चुका है कि बिना तय प्रक्रिया के नियुक्त किये गए कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक एवं अस्थायी कर्मियों को नियमित नहीं किया जा सकता है।

अगर ऐसा किया जाता है तो यह उन योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा जो तय प्रक्रिया के तहत अपनी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इस तरह कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक एवं अस्थायी तौर पर नियुक्त कर अगर सरकार इन्हें बाद में नियमित करती है तो यह एक तरह से नियुक्ति किये जाने का अन्य माध्यम बन जाएगा, जिसे की स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

इससे पहले हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2016 को इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा इन कर्मियों को नियमित करने की नीति पर रोक लगा दी थी और कहा था कि यह नियुक्तियां इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर ही निर्भर करेंगी। अब हाईकोर्ट इन सभी याचिकाओं पर सभी पक्षों को सुनने के बाद कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक एवं अस्थायी तौर कार्यरत कर्मियों को नियमित करने की जो नीति बनाकर लागू किया था उसे रद्द कर दिया और सरकार को इन सभी पदों पर छह महीने में नए सिरे से विज्ञापन जारी कर नियुक्तियां करने के आदेश दे दिए हैं।


यह है मामला
सोनीपत निवासी योगेश एवं अन्य याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार ने ग्रुप-बी कर्मियों के लिए 16 जून, 18 जून और फिर ग्रुप सी और डी कर्मियों के लिए 7 जुलाई 2014 को इन कर्मचारियों को नियमित करने के लिए जो नीति बनाई है वह पूरी तरह से गैरकानूनी और  वर्ष 2006 में उमा देवी के केस में  सुप्रीम कोर्ट द्वारा पांच जजों की खंडपीठ के फैसले के भी खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के अनुसार सिर्फ एक बार ही कर्मचारियों को यह फायदा दिया जा सकता है और हरियाणा सरकार वर्ष 2011 में कई कर्मचारियों को पहले ही नियमित कर चुकी है।
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