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'देश के पैसे से प्रशिक्षण लेकर प्राइवेट तौर पर प्रोफेशनल खेलना सही कैसे है'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 24 Sep 2017 03:05 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की खेल नीति पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर खेल नीति से अच्छी नौकरी लेकर भी खिलाड़ी निजी प्रोफेशनल प्रैक्टिस कैसे कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। हरियाणा सरकार इस पर जवाब दाखिल करे, जिससे फैसला हो सके। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की यह टिप्पणी बाक्सर विजेंदर सिंह के प्रोफेशनल खेलने के मामले में लिए गए स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान आई है।
मामले को लेकर हाईकोर्ट के संज्ञान पर हरियाणा सरकार ने कहा कि सरकार ने विजेंदर सिंह को प्रोफेशनल खेलने की मंजूरी दे दी थी। बेंच ने कहा कि दो मामलों की सुनवाई साथ में हो रही है, जिसमें से विजेंदर की छुट्टी मामले का तो निपटारा हो चुका है, लेकिन उसके प्रोफेशनल खेलने का नहीं। खेल कोटे से सरकारी नौकरी लेकर पैसे के लिए प्रोफेशनल खेलने को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
बेंच ने कहा कि सरकारी पैसे पर प्रशिक्षण लेकर और सरकार से नौकरी लेकर मौका मिलते ही पैसे के लिए खेलना उचित नहीं है। इस पर नीति बनाने और भविष्य के लिए सचेत होना जरूरी है। बेंच ने सरकार को कहा कि वह इस मामले में अपना पक्ष रखे और बहस करे। कोर्ट ने सरकार को बहस के लिए समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
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हाईकोर्ट ने लिया हुआ है संज्ञान
हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने बाक्सर विजेंदर सिंह के ज्यादा पैसा कमाने के लिए प्रोफेशनल मुक्केबाजी में उतरने के लिए विदेशी कंपनी से करार करने की खबरों पर संज्ञान लिया हुआ हैं। हाईकोर्ट ने अपने संज्ञान में कहा है कि विजेंदर सिंह के इस फैसले से देश के लाखों खेल प्रेमी का दिल टूट गया। हाईकोर्ट ने इस कथन का हवाला दिया कि यह नहीं सोचना चाहिए कि देश ने हमें क्या दिया बल्कि यह सोचना चाहिए कि हमने देश के लिए क्या किया।
संज्ञान में कहा गया है कि खिलाड़ी देश के करदाताओं के पैसे से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण लेते हैं, सरकार पानी की तरह इन पर पैसा खर्च करती है। जब ये खिलाड़ी पदक लाने के योग्य होते हैं तो वे देश को छोड़ कर अपने और पैसे के लिए प्रोफेशनल तौर पर खेलने लग जाते हैं। संज्ञान में कहा गया है कि सरकार ऐसे खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी, पैसा, प्लाट सब कुछ देती है। वे सरकारी नौकरी में रहने के दौरान कई तरह के विज्ञापन में रोज नजर आते हैं और लाखों रुपये कमाते हैं।
आखिर, सरकार इस पर नजर क्यों नहीं रखती। सरकार को चाहिए कि जो खिलाड़ी यह सब लाभ देने के बाद देश के लिए खेलना छोड़ देते हैं, उनको दिए गए सभी लाभ चाहे वे पद हो, पैसा या प्लाट हो वापस ले।
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मामले को लेकर हाईकोर्ट के संज्ञान पर हरियाणा सरकार ने कहा कि सरकार ने विजेंदर सिंह को प्रोफेशनल खेलने की मंजूरी दे दी थी। बेंच ने कहा कि दो मामलों की सुनवाई साथ में हो रही है, जिसमें से विजेंदर की छुट्टी मामले का तो निपटारा हो चुका है, लेकिन उसके प्रोफेशनल खेलने का नहीं। खेल कोटे से सरकारी नौकरी लेकर पैसे के लिए प्रोफेशनल खेलने को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
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बेंच ने कहा कि सरकारी पैसे पर प्रशिक्षण लेकर और सरकार से नौकरी लेकर मौका मिलते ही पैसे के लिए खेलना उचित नहीं है। इस पर नीति बनाने और भविष्य के लिए सचेत होना जरूरी है। बेंच ने सरकार को कहा कि वह इस मामले में अपना पक्ष रखे और बहस करे। कोर्ट ने सरकार को बहस के लिए समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
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हाईकोर्ट ने लिया हुआ है संज्ञान
हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने बाक्सर विजेंदर सिंह के ज्यादा पैसा कमाने के लिए प्रोफेशनल मुक्केबाजी में उतरने के लिए विदेशी कंपनी से करार करने की खबरों पर संज्ञान लिया हुआ हैं। हाईकोर्ट ने अपने संज्ञान में कहा है कि विजेंदर सिंह के इस फैसले से देश के लाखों खेल प्रेमी का दिल टूट गया। हाईकोर्ट ने इस कथन का हवाला दिया कि यह नहीं सोचना चाहिए कि देश ने हमें क्या दिया बल्कि यह सोचना चाहिए कि हमने देश के लिए क्या किया।
संज्ञान में कहा गया है कि खिलाड़ी देश के करदाताओं के पैसे से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण लेते हैं, सरकार पानी की तरह इन पर पैसा खर्च करती है। जब ये खिलाड़ी पदक लाने के योग्य होते हैं तो वे देश को छोड़ कर अपने और पैसे के लिए प्रोफेशनल तौर पर खेलने लग जाते हैं। संज्ञान में कहा गया है कि सरकार ऐसे खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी, पैसा, प्लाट सब कुछ देती है। वे सरकारी नौकरी में रहने के दौरान कई तरह के विज्ञापन में रोज नजर आते हैं और लाखों रुपये कमाते हैं।
आखिर, सरकार इस पर नजर क्यों नहीं रखती। सरकार को चाहिए कि जो खिलाड़ी यह सब लाभ देने के बाद देश के लिए खेलना छोड़ देते हैं, उनको दिए गए सभी लाभ चाहे वे पद हो, पैसा या प्लाट हो वापस ले।