HC में एमिक्स क्यूरी ने उठाया सवाल, ‘मधुशाला’ को पद्मभूषण तो पेग पर आपत्ति क्यों

विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 18 May 2018 11:24 AM IST
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गानों में शराब, गन कल्चर और अश्लीलता रोकने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कई सवाल उठाए। एमिक्स क्यूरी तनु बेदी ने कहा कि अश्लीलता के नाम पर किसी की आजादी नहीं छीनी जा सकती। मधुशाला के लिए हरिवंश राय बच्चन को पद्मभूषण दिया गया तो गानों में पेग-ठेका जैसे शब्दों पर आपत्ति क्यों है? हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि सबसे पहले अश्लीलता और आपत्तिजनक क्या है यह तय करना जरूरी है। इसके बाद ही रोक का सवाल उठता है।
कोर्ट ने सभी पक्षों को इस विषय पर अगली सुनवाई के दौरान सुझाव सौंपने के आदेश दिए हैं। प्रोफेसर पंडितराव धारेनवर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर शादियों व अन्य कार्यक्रमों में अश्लील गाने व हथियारों पर रोक लगाने के लिए आदेश जारी करने की हाईकोर्ट से अपील की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि पंजाब संतों और पीरों की भूमि है । इस पवित्र भूमि से गुरुओं का इतिहास जुड़ा है, जिन्होंने शांति व सादगी से रहने का संदेश दिया था।

इस पवित्र भूमि पर सांस्कृतिक प्रदूषण फैल रहा है और झूठे दिखावे के लिए हथियारों के इस्तेमाल  से लोग अपनी जान गवां रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां गुरुनानक देव ने अपनी वाणी आसा दी वार में कहा है कि जो राजा को भी जन्म देती है उस औरत को कमजोर कैसे कहा जा सकता है। गुरुओं द्वारा महिलाओं को इतना सम्मान दिया गया और अब उसी महिला को उपभोग की वस्तु के रूप में पेश किया जा रहा है।

खराबी गानों में नहीं, लोगों की मानसिकता में है: एमिकस क्यूरी
वीरवार को सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी एडवोकेट तनु बेदी ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस प्रकार के साहित्य को बैन नहीं किया जा सकता। खराबी इन गानों में नहीं बल्कि इनसे प्रभावित होने वाले लोगों की मानसिकता में है। एक गाना लाखों लोग सुनते हैं और यदि कोई एक व्यक्ति किसी घटना को अंजाम दे तो कैसे उस गाने को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मधुशाला और पेग-ठेका यह एक जैसे हैं ।  इनमें से एक के लिए पद्मभूषण मिलता है और दूसरे को बैन करने की बात की जा रही है। ऐसा करने से पूरा शराब उद्योग तबाह हो जाएगा।  किसी की आजादी के लिए देश की संस्कृति को नष्ट होने नहीं दिया जा सकता।

तय करना होगा अश्लीलता क्या है
 सभी पक्षों को सुनकर हाईकोर्ट ने कहा कि पहले यह तय करना जरूरी है कि अश्लीलता क्या है और किस हद तक है। आपत्तिजनक क्या है और उसे कहां तक रोका जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने इसके लिए अगली सुनवाई पर सभी पक्षों को सुझाव सौंपने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट को बताया गया कि पंजाब ने हाल ही में अश्लीलता रोकने के लिए एक आयोग का गठन किया है। हरियाणा व यूटी में भी ऐसे आयोग बनाए जाने चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन को अगली सुनवाई पर जवाब सौंपने के आदेश दिए हैं।

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