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कर्मचारियों के वेतन को पैसा नहीं तो पीयू की स्थिति कैसे सुधारेंगे: हाईकोर्ट

Thu, 08 Feb 2018 09:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 08 Feb 2018 09:33 AM IST
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Punjab haryana highcourt, punjab government, punjab university
कोर्ट - फोटो : Demo Pics
पंजाब सरकार द्वारा पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू ) से हरियाणा के कॉलेजों को जोड़ने और ग्रांट लेने के प्रस्ताव का विरोध करने पर हाईकोर्ट ने  कड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि अपने कर्मियों को वेतन देने के लिए आपके पास पैसा नहीं है तो पीयू की वित्तीय स्थिति कैसे सुधारेंगे। इस पर पंजाब सरकार ने पीयू की ग्रांट बढ़ाने संबंधी जवाब के लिए हाईकोर्ट से दो सप्ताह की मोहलत मांगी है। 
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गौरतलब है कि पीयू की खराब वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए हाईकोर्ट संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान हरियाणा के कालेजों को पीयू से जोड़ने और ग्रांट लेने संबंधी प्रस्ताव पर पंजाब सरकार ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह मुद्दा पंजाब, केंद्र और पीयू के बीच का है। यूनिवर्सिटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हरियाणा की जरूरत नहीं है हम इसके लिए सहयोग देंगे। 
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 जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ के सामने सुनवाई शुरू होते ही पंजाब हायर एजुकेशन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसके संधू ने अपने हलफनामे के माध्यम से हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा अब अपने कॉलेज पीयू से जोड़ना चाहता है ताकि पीयू की बदहाल स्थिति का फायदा उठा कर वहां दखलंदाजी कर सके। पीयू के मौजूदा स्टेटस में कोई बदलाव पंजाब सरकार को स्वीकार नहीं है। 
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इसी बीच बताया गया कि हरियाणा द्वारा केंद्र को पीयू से हरियाणा के कॉलेज जोड़ने से जुड़ा जो प्रस्ताव भेजा गया थाउसपर पंजाब सरकार से उनकी राय मांगी गई थी। पंजाब सरकार ने इससे साफ इनकार कर दिया। हरियाणा ने प्रस्ताव दिया था कि वे पीयू को ग्रांट दे सकते हैं यदि उनके कुछ कॉलेज पीयू से जोड़ लिए जाएं। 

हरियाणा को दिखाया पीयू का इतिहास 

Punjab haryana highcourt, punjab government, punjab university
court - फोटो : Demo Photo
पंजाब ने 37 फीसदी बढ़ाई ग्रांट
पंजाब सरकार ने बताया कि पीयू की वार्षिक ग्रांट को 37 प्रतिशत बढ़ाया गया है जिससे यह 20 करोड़ से बढ़ाकर 27 करोड़ हो गई है। अभी इसे आगे और बढ़ाने का निर्णय लेना बाकी है। पीयू के आर्थिक संतुलन को बनाये रखने के लिए पीयू और सरकार के बीच आपसी वार्ता बेहद जरूरी है। प्लानिंग अगले दस वर्ष के लिए की जानी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवधि में कितनी ग्रांट बढ़ाई जाए कि पीयू को वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े।

हरियाणा को दिखाया पीयू का इतिहास 
पंजाब सरकार ने पीयू के इतिहास को रखते हुए बताया कि पंजाब री ऑर्गेनाइजेशन एक्ट-1966 के तहत पीयू की वार्षिक ग्रांट में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ की 20:20:20:40 प्रतिशत हिस्सेदारी तय की गई थी।

बाद में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने अपनी हिस्सेदारी वापस ले ली। हरियाणा ने अपने कॉलेज भी 1976 तक पीयू से अलग कर लिए थे। उसके बाद से ही पीयू की वार्षिक ग्रांट में पंजाब पर 40 प्रतिशत और चंडीगढ़ पर 60 प्रतिशत जिम्मेदारी आ गई थी। जब पहले हरियाणा ने अपने कॉलेज पीयू से अलग कर लिए थे तो अब उसे शामिल नहीं होने दिया जा सकता। 
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