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विकास बराला के बाद अब HC के नोटिस ने बढ़ाई सुभाष बराला की मुश्किलें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 25 Jan 2018 03:53 PM IST
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सुभाष बराला
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पहले बेटे विकास बराला ने और अब हाईकोर्ट के एक नोटिस ने हरियाणा प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विकास बराला प्रकरण के बाद अब हरियाणा रोडवेज फतेहाबाद डीपो के एक इंस्पेक्टर के तबादले के मामले में हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। साथ ही इस मामले को सीएम के संज्ञान में लाने के आदेश दिए हैं। साथ ही तबादले के आदेशों पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।
मामला हरियाणा रोडवेज के फतेहाबाद डिपो में कार्यरत इंस्पेक्टर इश्वर सिंह बूरा के तबादले से जुड़ा हुआ है। इश्वर सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि वह हरियाणा रोडवेज फतेहाबाद डीपो में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत था। इसी दौरान वहां मौजूद सफाई कर्मियों में से दो की गैर मौजूदगी के कारण उन्होंने उनकी अनुपस्थिति दर्ज कर दी। इसकी रिपोर्ट बनाकर रोडवेज जीएम को ज़ेज दी।
इसके बाद अगले दिन सुभाष के भतीजे ने आकर उन्हें समझाया कि कर्मी सुभाष बराला के खास हैं और आगे उनकी अनुपस्थिति दर्ज न की जाए। बावजूद इसके बूरा ने अपना काम ईमानदारी से निभाया और दोबारा अनुपस्थिति दर्ज कर जीएम को रिपोर्ट भेज दी। नतीजा यह हुआ कि उनका तबादला दिल्ली आईएसबीटी कर दिया गया। इसके बाद बूरा ने रोडवेज जीएम को कॉल किया और जीएम ने उन्हें बराला से बात करने की सलाह दी।
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याची ने यह कॉल रिकार्ड कर ली। रिकार्डिंग और इसकी सीडी को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली। याचिका जब सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंची तो ओपन कोर्ट में यह रिकार्डिंग सुनाई गई। कोर्ट ने इस मामले में सुज़ाष बराला सहित हरियाणा सरकार, डीजी रोडवेज और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही याचिकाकर्ता का दिल्ली तबादला करने के आदेशों पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से मौजूद काउंसिल को कहा कि वे इस मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लेकर आए। हाईकोर्ट के इन आदेशों के चलते अब बराला की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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मामला हरियाणा रोडवेज के फतेहाबाद डिपो में कार्यरत इंस्पेक्टर इश्वर सिंह बूरा के तबादले से जुड़ा हुआ है। इश्वर सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि वह हरियाणा रोडवेज फतेहाबाद डीपो में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत था। इसी दौरान वहां मौजूद सफाई कर्मियों में से दो की गैर मौजूदगी के कारण उन्होंने उनकी अनुपस्थिति दर्ज कर दी। इसकी रिपोर्ट बनाकर रोडवेज जीएम को ज़ेज दी।
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इसके बाद अगले दिन सुभाष के भतीजे ने आकर उन्हें समझाया कि कर्मी सुभाष बराला के खास हैं और आगे उनकी अनुपस्थिति दर्ज न की जाए। बावजूद इसके बूरा ने अपना काम ईमानदारी से निभाया और दोबारा अनुपस्थिति दर्ज कर जीएम को रिपोर्ट भेज दी। नतीजा यह हुआ कि उनका तबादला दिल्ली आईएसबीटी कर दिया गया। इसके बाद बूरा ने रोडवेज जीएम को कॉल किया और जीएम ने उन्हें बराला से बात करने की सलाह दी।
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याची ने यह कॉल रिकार्ड कर ली। रिकार्डिंग और इसकी सीडी को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली। याचिका जब सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंची तो ओपन कोर्ट में यह रिकार्डिंग सुनाई गई। कोर्ट ने इस मामले में सुज़ाष बराला सहित हरियाणा सरकार, डीजी रोडवेज और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही याचिकाकर्ता का दिल्ली तबादला करने के आदेशों पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से मौजूद काउंसिल को कहा कि वे इस मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लेकर आए। हाईकोर्ट के इन आदेशों के चलते अब बराला की मुश्किलें बढ़ गई हैं।