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सुखना को देखने पहुंचे हाईकोर्ट के जज, टिप्पणी करते हुए दिए सख्त निर्देश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 20 Nov 2016 10:04 AM IST
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सुखना लेक का दौरा करने पहुंची हाईकोर्ट के जजों की टीम
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तेजी से सूख रही सुखना लेक को देखने के लिए हाईकोर्ट के जज पहुंचे तो उन्होंने टिप्पणी करते हुए कई सख्त निर्देश अफसरों को दिए। सुखना के गिरते जलस्तर की समस्या का समाधान ढूंढने के लिए दस्ते के साथ निकले जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन।
उन्होंने निर्धारित स्थानों का निरीक्षण करने के बाद टिप्पणी करते हुए कहा कि डैम से पानी लाया जाए या बोरवैल किया जाए, सुखना को फिर से वेल करना ही इस निरीक्षण का मकसद है। विजिट पूरी होने के बाद एमिकस क्यूरी तनु बेदी की अगुवाई में एक टीम को पंचकूला क्षेत्र से पानी के विकल्पों को तलाशने के लिए रवाना कर दिया गया।
जस्टिस मित्तल की ओर से यूटी और पंजाब में मौजूद विकल्पों के बारे में इससे पहले विजिट कर जानकारी ली गई। शनिवार को जस्टिस एके मित्तल, जस्टिस रामेंद्र जैन, चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल, एमिकस क्यूरी तनु बेदी व एमएल सरीन सहित हरियाणा, पंजाब और यूटी के आला अधिकारी कोर्ट नंबर चार में एकत्रित हुए।
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इसके बाद निर्धारित किया गया कि कौन-कौन से स्थानों का निरीक्षण किया जाएगा। जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की अगुवाई वाले इस पूरे दस्ते ने हाईकोर्ट से अपनी विजिट को आरंभ करते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में मौजूद ऐसे सभी विकल्पों को परखा, जिससे सुखना में पानी लाने को संभव बनाया जा सकता है।
पूरे दस्ते ने सिरसवां डैम, जयंती डैम, सेक्टर 39 वाटर वर्क और सेक्टर 28 के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि का निरीक्षण किया। इस दौरान इन सभी स्थानों पर मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों से जस्टिस एके मित्तल ने बात की और जाना कि क्या इस पानी को सुखना की ओर मोड़ा जा सकता है।
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उन्होंने निर्धारित स्थानों का निरीक्षण करने के बाद टिप्पणी करते हुए कहा कि डैम से पानी लाया जाए या बोरवैल किया जाए, सुखना को फिर से वेल करना ही इस निरीक्षण का मकसद है। विजिट पूरी होने के बाद एमिकस क्यूरी तनु बेदी की अगुवाई में एक टीम को पंचकूला क्षेत्र से पानी के विकल्पों को तलाशने के लिए रवाना कर दिया गया।
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जस्टिस मित्तल की ओर से यूटी और पंजाब में मौजूद विकल्पों के बारे में इससे पहले विजिट कर जानकारी ली गई। शनिवार को जस्टिस एके मित्तल, जस्टिस रामेंद्र जैन, चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल, एमिकस क्यूरी तनु बेदी व एमएल सरीन सहित हरियाणा, पंजाब और यूटी के आला अधिकारी कोर्ट नंबर चार में एकत्रित हुए।
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इसके बाद निर्धारित किया गया कि कौन-कौन से स्थानों का निरीक्षण किया जाएगा। जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की अगुवाई वाले इस पूरे दस्ते ने हाईकोर्ट से अपनी विजिट को आरंभ करते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में मौजूद ऐसे सभी विकल्पों को परखा, जिससे सुखना में पानी लाने को संभव बनाया जा सकता है।
पूरे दस्ते ने सिरसवां डैम, जयंती डैम, सेक्टर 39 वाटर वर्क और सेक्टर 28 के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि का निरीक्षण किया। इस दौरान इन सभी स्थानों पर मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों से जस्टिस एके मित्तल ने बात की और जाना कि क्या इस पानी को सुखना की ओर मोड़ा जा सकता है।
धनास लेक का किया गया निरीक्षण
चंडीगढ़ में सुखना लेक का एक दृश्य
- फोटो : फाइल फोटो
हाईकोर्ट से निकला दल अन्य स्थानों के साथ-साथ धनास की लेक पर भी पहुंचा। यहां आकर देखा गया कि कैसे लेक को ट्यूबवेल के माध्यम से भरा जा सकता है। इस दौरान यहां मौजूद विशेषज्ञों से इस लेक की तर्ज पर सुखना को भरने के बारे में सुझाव मांगने के साथ ही यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या पानी यहां से सुखना की ओर लेकर जाया जा सकता है।
सुखना के लिए खूब बहाया पसीना
जजों ने अपने दस्ते के साथ विभिन्न डैमों का दौरा करने के साथ ही कई ऐसे दुर्गम मार्गों पर जाकर भी सुखना के लिए पानी का मार्ग तलाशने का प्रयास किया, जहां जाना भी मुश्किल था। कहीं एक -दूसरे का हाथ पकड़-पकड़ कर आगे बढ़े तो कहीं लंबी दूरी पैदल चलकर तय की गई। आखिर पूरे दिन पसीना बहाने के बाद वापस पूरा दस्ता हाईकोर्ट में एकत्रित हुआ।
जंगलों में घूमकर ढूंढा पानी का मार्ग
एमिकस क्यूरी की अगुवाई वाली टीम ने शनिवार शाम को एचएमटी के नजदीक सूरजपुर के पास से निकलने वाली बरसाती नादी से सुखना की ओर पानी मोड़ने वाले एक सुझाव की वास्तविक संभावनाओं को जांचने के लिए पंजाब, यूटी और हरियाणा के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के साथ दौरा किया।
सबसे पहले बरसाती नदी में औसत रहने वाले पानी के बारे में जानकारी ली गई और इसके बाद इस नदी से जिस रूट से पानी मोड़े जाने का सुझाव है टीम उस ओर चल दी। जंगल के बीच से होती हुई टीम ने प्रोजेक्ट के अनुरूप पूरी साइट का निरीक्षण किया और इस पर अपनी रिपोर्ट को कलमबद्ध कर लिया।
सुखना के लिए खूब बहाया पसीना
जजों ने अपने दस्ते के साथ विभिन्न डैमों का दौरा करने के साथ ही कई ऐसे दुर्गम मार्गों पर जाकर भी सुखना के लिए पानी का मार्ग तलाशने का प्रयास किया, जहां जाना भी मुश्किल था। कहीं एक -दूसरे का हाथ पकड़-पकड़ कर आगे बढ़े तो कहीं लंबी दूरी पैदल चलकर तय की गई। आखिर पूरे दिन पसीना बहाने के बाद वापस पूरा दस्ता हाईकोर्ट में एकत्रित हुआ।
जंगलों में घूमकर ढूंढा पानी का मार्ग
एमिकस क्यूरी की अगुवाई वाली टीम ने शनिवार शाम को एचएमटी के नजदीक सूरजपुर के पास से निकलने वाली बरसाती नादी से सुखना की ओर पानी मोड़ने वाले एक सुझाव की वास्तविक संभावनाओं को जांचने के लिए पंजाब, यूटी और हरियाणा के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के साथ दौरा किया।
सबसे पहले बरसाती नदी में औसत रहने वाले पानी के बारे में जानकारी ली गई और इसके बाद इस नदी से जिस रूट से पानी मोड़े जाने का सुझाव है टीम उस ओर चल दी। जंगल के बीच से होती हुई टीम ने प्रोजेक्ट के अनुरूप पूरी साइट का निरीक्षण किया और इस पर अपनी रिपोर्ट को कलमबद्ध कर लिया।