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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana Highcourt issued notice in matter of electricity department privatisation  

फायदे में है चंडीगढ़ बिजली विभाग तो निजीकरण क्यों, टेंडर पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Wed, 02 Dec 2020 10:19 AM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 02 Dec 2020 10:19 AM IST
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Punjab-Haryana Highcourt issued notice in matter of electricity department privatisation  
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

चंडीगढ़ में यूटी पावर मैन यूनियन ने बिजली विभाग के निजीकरण के निर्णय व इसके लिए जारी टेंडर को चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक टेंडर की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी है।

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यूटी पावर मैन यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त शर्मा ने याचिका दी थी कि चंडीगढ़ में पड़ोसी राज्यों की तुलना में बिजली सस्ती होने के बावजूद विभाग मुनाफे में है। फायदे का विभाग होने के बावजूद इसके निजीकरण का फैसला लिया जा रहा है जो गलत है। 
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केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 17 अप्रैल को बिजली विभाग के निजीकरण के लिए प्रस्ताव मांगे थे। 5 जून को याचिकाकर्ता ने सुझाव देकर कहा था कि विभाग का काम अच्छा चल रहा है और इसके निजीकरण की आवश्यकता नहीं है। अन्य संगठनों ने भी निजीकरण के इस फैसले पर अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं थीं। 
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10 जून को केंद्र सरकार ने सभी केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली विभाग के निजीकरण के लिए ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। यूनियन ने 6 जुलाई को प्रधानमंत्री को मांग पत्र देकर विरोध दर्ज करवाया था। इसके बाद 17 जुलाई को ऊर्जा सचिव को भी मांग पत्र सौंपा गया। 

इसके बाद जुलाई और 2 सितंबर को फिर मांग पत्र दिया गया। इसके बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन ने 10 नवंबर को एक पब्लिक नोटिस जारी कर शहर के बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए निजी कंपनियों से बोली मंगवा ली। 


याचिकाकर्ता यूनियन ने अब इस निर्णय को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। साथ ही यह भी अपील की कि याचिका लंबित रहते इस टेंडर की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद याचिका पर सभी प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए टेंडर की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। 

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