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बहू के यौन उत्पीड़न के आरोपी को जमानत नहीं: हाईकोर्ट ने कहा-ससुर और बहू का रिश्ता बाप-बेटी जैसा, ये अस्वीकार्य
Thu, 14 Nov 2024 09:39 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 14 Nov 2024 09:39 AM IST
सार
यमुनानगर के एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत मांगी थी। उस पर उसकी बहू ने अधिक दहेज लाने का दबाव बनाने और संबंध बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पुत्रवधू का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इन्कार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ससुर-बहू का रिश्ता बाप-बेटी जैसा होता है। अनजाने में किया गया अनुचित कृत्य भी इस रिश्ते के लिए हानिकारक हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से जांच एजेंसी की पूरी सच्चाई सामने लाने की क्षमता में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
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यमुनानगर निवासी व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए पुत्रवधू का शील भंग और यौन उत्पीड़न करने के मामले में दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत की मांग की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने नशा करके उसके साथ दुर्व्यवहार किया और ससुर ने उस पर अधिक दहेज लाने का दबाव बनाया। साथ ही ससुर ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का भी प्रयास किया और उसके के पति ने इन कार्यों का समर्थन किया और धमकी दी कि अगर उसने विरोध किया तो तलाक दे देगा।
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हाईकोर्ट ने पाया कि जब याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया, तो शिकायतकर्ता ने उस बातचीत को रिकार्ड कर लिया था, जिसमें याचिकाकर्ता ( ससुर ) अनुचित टिप्पणी कर रहा था। हाईकोर्ट ने कहा कि ससुर और बहू का रिश्ता पिता और बेटी के बीच के रिश्ते जैसा होता है, जो आपसी स्नेह और उच्च सम्मान पर आधारित होता है। अभियोजन पक्ष द्वारा एकत्र की गई सामग्री से पता चलता है कि पीड़ित/शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता के बीच वॉयस रिकार्डिंग वाली एक पेन-ड्राइव को कब्जे में ले लिया गया है, जो याचिकाकर्ता के अपराध करने का संकेत देती है। आरोपी को जमानत देने से जांच एजेंसी के स्वतंत्र, निष्पक्ष जांच करने के अधिकारों में अनुचित रूप से बाधा उत्पन्न होगी। कोर्ट ने कहा कि इच्छा व्यक्त करना, आगे बढ़ना, पुत्रवधू को यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करना या इस तरह के किसी भी प्रभाव के लिए अनुचित टिप्पणी करना, ससुर का भ्रष्ट कार्य हैं।
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