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वकीलों के आश्रित या सेवा में होने को लेकर हाईकोर्ट का बेहद अहम फैसला, यहां पढ़िए
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:30 AM IST
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जिन भर्तियों में आवेदन की शर्त सेवा में न होना है, उसके लिए वकील आवेदन कर सकते हैं। वकील की प्रैक्टिस को सेवा में होना नहीं माना जा सकता है। वकील की न तो निर्धारित आय होती है और न ही वेतन। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम आदेश पंजाब में सिविल जज की 71 पदों पर हो रही नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुनाया है। यह याचिका एक वकील ने दाखिल की थी।
याची ने कहा था कि एक्स सर्विसमैन के आश्रितों की श्रेणी में याची ने आवेदन किया था। नियुक्ति के लिए शर्त थी कि आवेदक सर्विस में नहीं होना चाहिए। याची ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 6 से 13 चंडीगढ़ और पंजाब की विभिन्न अदालतों में एडवोकेट के तौर पर प्रैक्टिस करते हैं और ऐसे में उन्हें आश्रित की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने याची की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि एक नए वकील के लिए प्रैक्टिस का पहला दिन ही संघर्ष की शुरुआत होता है। उसे खुद को स्थापित करने और आय के साधन बनाने में सालों लग जाते हैं।
ऐसे में यह कहना कि वकील की प्रैक्टिस के चलते उसे आश्रित न माना जाए, सही नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि नए वकील के पास न तो निश्चित आय होती है और न ही कोई गारंटी होती है कि उसे कुछ आय मिलेगी ही। वकील की प्रैक्टिस को सर्विस नहीं माना जा सकता क्योंकि इसके लिए कोई पूर्व निर्धारित किया गया वेतन नहीं होता है। इसके साथ ही याची ने आपत्ति जताई थी कि इंटरव्यू में पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन ने भाग नहीं लिया था।
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इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि वह शामिल नहीं हुए थे तो भी इंटरव्यू के बाकी सदस्य शामिल हुए थे। इस स्थिति में इंटरव्यू कमेटी का कोरम पूरा था इसलिए इंटरव्यू प्रक्रिया सही थी। इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट के जस्टिस एबी चौधरी व जस्टिस कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
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याची ने कहा था कि एक्स सर्विसमैन के आश्रितों की श्रेणी में याची ने आवेदन किया था। नियुक्ति के लिए शर्त थी कि आवेदक सर्विस में नहीं होना चाहिए। याची ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 6 से 13 चंडीगढ़ और पंजाब की विभिन्न अदालतों में एडवोकेट के तौर पर प्रैक्टिस करते हैं और ऐसे में उन्हें आश्रित की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने याची की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि एक नए वकील के लिए प्रैक्टिस का पहला दिन ही संघर्ष की शुरुआत होता है। उसे खुद को स्थापित करने और आय के साधन बनाने में सालों लग जाते हैं।
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ऐसे में यह कहना कि वकील की प्रैक्टिस के चलते उसे आश्रित न माना जाए, सही नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि नए वकील के पास न तो निश्चित आय होती है और न ही कोई गारंटी होती है कि उसे कुछ आय मिलेगी ही। वकील की प्रैक्टिस को सर्विस नहीं माना जा सकता क्योंकि इसके लिए कोई पूर्व निर्धारित किया गया वेतन नहीं होता है। इसके साथ ही याची ने आपत्ति जताई थी कि इंटरव्यू में पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन ने भाग नहीं लिया था।
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इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि वह शामिल नहीं हुए थे तो भी इंटरव्यू के बाकी सदस्य शामिल हुए थे। इस स्थिति में इंटरव्यू कमेटी का कोरम पूरा था इसलिए इंटरव्यू प्रक्रिया सही थी। इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट के जस्टिस एबी चौधरी व जस्टिस कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।