Highcourt News: भतीजी से दुष्कर्म के आरोपी चाचा की उम्रकैद की सजा बरकरार, कोर्ट ने बताया समाज के लिए खतरा
हाईकोर्ट ने याची की दलील खारिज करते हुए कहा कि उसने चाचा और भतीजी के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है और ऐसा व्यक्ति समाज के लिए खतरा है। कोर्ट ने कहा कि यह अविश्वसनीय है कि कोई जमीन के मामूली विवाद के लिए अपनी बेटी से दुष्कर्म का आरोप लगाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भतीजी से दुष्कर्म करने के दोषी चाचा को कुरुक्षेत्र की जिला अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि याची ने चाचा-भतीजी के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है और ऐसे व्यक्ति समाज के लिए खतरा होते हैं।
कुरुक्षेत्र निवासी व्यक्ति ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि उसके भाई ने पुलिस को शिकायत दी थी कि याची ने उसकी बेटी से दुष्कर्म किया है। एफआईआर के अनुसार 19 अगस्त 2008 को बेटी जब ट्यूशन पढ़कर लौटी तो शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी घर पर नहीं थे। दोनों कुरुक्षेत्र शहर में दवा लेने गए थे। इस दौरान लड़की का चाचा शिकायतकर्ता के घर पहुंचा और उसकी 12 साल की बेटी (अपनी भतीजी) से दुष्कर्म किया। जब शिकायतकर्ता घर पहुंचा तो पाया कि उसकी बेटी सहमी सी बैठी थी। पूछने पर उसने कुछ नहीं बताया। अगले दिन भी उसका बर्ताव ऐसा ही रहा तो पिता ने उससे दोबारा पूछा। इस बार बेटी ने सारी बात बताई । इसके बाद पिता ने उसे कुरुक्षेत्र के अस्पताल में भर्ती करवाया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची से दुष्कर्म की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच आरंभ कर दी।
कुरुक्षेत्र की अदालत ने याची को दोषी करार दे उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसी सजा को अपील के माध्यम से याची ने चुनौती दी थी। याची ने कहा कि उसके व उसके भाई के बीच जमीन को लेकर कुछ विवाद है जिसके चलते यह झूठा केस बनाया गया है। हाईकोर्ट ने याची की दलील खारिज करते हुए कहा कि उसने चाचा और भतीजी के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है और ऐसा व्यक्ति समाज के लिए खतरा है। कोर्ट ने कहा कि यह अविश्वसनीय है कि कोई जमीन के मामूली विवाद के लिए अपनी बेटी से दुष्कर्म का आरोप लगाएगा। हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए याची की अपील को खारिज कर दिया।
महिला से मातृत्व का अधिकार छीनना क्रूरता, तलाक का आदेश
महिला की मर्जी के खिलाफ गर्भपात करा मातृत्व का अधिकार छीनने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रूरता माना है। इसके साथ ही महिला की याचिका मंजूर करते हुए तलाक का आदेश दिया है। हिसार की फैमिली कोर्ट ने तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था और इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में अपील की।
महिला ने बताया कि उसका विवाह 2012 में हिसार में हुआ था। उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया गया। शादी से पहले अपनी कमाई से उसने जो रकम जोड़ी थी उसे भी सास ने छीन लिया। 2014 में वह गर्भवती हुई तो पति ने जबरन गर्भपात करवा दिया। पति ने कहा कि अभी बच्चा नहीं चाहिए। गर्भपात के बाद उसे आराम नहीं करने दिया गया। इस कारण वह ऐसी बीमारी का शिकार हो गई कि कभी मां नहीं बन सकती। महिला ने बताया कि पति व ससुराल वाले उसके चरित्र पर शक करते हैं। उसके जन्मदिन पर रिश्तेदारों व साथ काम करने वालों ने बधाई दी तो पति ने मोबाइल तोड़ दिया।
इन दलीलों का विरोध करते हुए उसके पति ने कहा कि वह पत्नी के साथ रहने को तैयार है, लेकिन पत्नी उसके साथ नहीं रहना चाहती है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक औरत के लिए मातृत्व बेहद मायने रखता है। उसकी मर्जी के खिलाफ गर्भ गिराना मातृत्व का अधिकार छीनना है। यह एक महिला के प्रति क्रूरता है। महिला ने बच्चे की चाह के लिए अपना इलाज तक कराया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसे में पति से तलाक लेने का उसे पूरा अधिकार है।