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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana High Court summoned Chandigarh MC Commissioner Anandita Mitra on garbage dumping ground at Daddumajra 

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश: कचरे के ढेर को हटाने के लिए क्या किया, चंडीगढ़ की निगम आयुक्त खुद आकर बताएं  

Fri, 06 May 2022 01:01 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 06 May 2022 01:01 PM IST
सार

डड्डूमाजरा निवासी दीप्ति सिंह ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया था कि वर्तमान में जिस स्थान पर कूड़ा डाला जा रहा है वहां के आस-पास के लोगों की सेहत पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

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Punjab Haryana High Court summoned Chandigarh MC Commissioner Anandita Mitra on garbage dumping ground at Daddumajra 
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में डड्डूमाजरा स्थित गारबेज डंपिंग ग्राउंड के कारण लोगों की सेहत पर पड़ रहे बुरे प्रभाव के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा को तलब कर लिया है। आयुक्त को अगली सुनवाई पर अदालत में हाजिर होकर कूड़े के निपटारे के लिए वैकल्पिक स्थान ढूंढने के मामले पर जवाब देना होगा।

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डड्डूमाजरा निवासी दीप्ति सिंह ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया था कि वर्तमान में जिस स्थान पर कूड़ा डाला जा रहा है वहां के आस-पास के लोगों की सेहत पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस बारे में प्रशासन से लेकर नगर निगम सभी वाकिफ हैं लेकिन लोगों की परेशानी का निवारण करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय निवासियों ने इस डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। 
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इसके साथ ही हाईकोर्ट को बताया गया कि इस ग्राउंड की गंदगी के कारण आस-पास के लोगों का रहना तक मुहाल हो गया है। यहां से गंदी बदबू उठती है, जिससे लोग इसके नजदीक आने से भी कतराते हैं। इस कचरे के ढेर के कारण लोगों के बीमार होने के मामले बढ़ रहे हैं। साथ ही कोर्ट को बताया गया कि इस कचरे के ढेर में अक्सर आग लग जाती है और इससे लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ जाती है। 
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वीरवार को मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो कोर्ट ने पूछा कि इतने लंबे समय से याचिका लंबित है और अभी तक इस दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर हाईकोर्ट ने अब चंडीगढ़ नगर निगम के आयुक्त को तलब कर लिया है। अगली सुनवाई पर कचरे के निपटारे और इसके लिए वैकल्पिक स्थान की उपलब्धता पर नगर निगम आयुक्त को जवाब देना होगा।

यह है पूरा विवाद

वर्ष 2005 में जेपी ग्रुप को कचरा प्रबंधन के लिए 10 एकड़ जमीन दी गई थी और 2008 में काम शुरू हुआ था। वर्ष 2016 में जेपी ग्रुप ने टिपिंग चार्ज की मांग की, जिसके बाद से विवाद बढ़ता गया। वर्ष 2020 से नगर निगम ने कचरा प्रबंधन का काम अपने हाथों में ले लिया। 2020 में नगर निगम महज 13.36 प्रतिशत कचरे का ही निपटारा कर सका था। पिछले साल मई तक केवल 16.09 प्रतिशत का निपटारा ही किया जा सका था। याची ने बताया कि वर्ष 2016 से 2020 के बीच कचरे में 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन निपटारे में सिर्फ 12 प्रतिशत। ऐसे में कचरा 80 प्रतिशत तक बढ़ गया है। निगम के अधिकारी कचरा प्रबंधन के नाम पर विदेश यात्रा करके आते हैं, लेकिन इसका कोई फायदा शहर में नजर नहीं आया है।

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