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Chandigarh: जजों के खिलाफ शिकायतों की जानकारी उपलब्ध करवाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Tue, 09 Aug 2022 05:07 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 09 Aug 2022 05:07 PM IST
सार
हाईकोर्ट के जजों के बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं दी जा सकती है क्योंकि यह सूचना के अधिकार के दायरे में नहीं आती हैं। केंद्रीय सूचना आयोग ने हाईकोर्ट की दलील को अस्वीकार करते हुए हाईकोर्ट को शिकायतों के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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विस्तार
केंद्रीय सूचना आयोग की ओर से हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ आई शिकायतों की जानकारी उपलब्ध करवाने के आदेश पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग व सूचना मांगने वाले को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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नारनौल निवासी एडवोकेट मनीष वशिष्ठ ने हाईकोर्ट से आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी कि 2009 से अब तक जजों के खिलाफ कितनी शिकायतें आई हैं। इन पर क्या कार्रवाई हुई और कितनी शिकायतें लंबित हैं। हाईकोर्ट ने यह जानकारी उपलब्ध करवाने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ वशिष्ठ ने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील दाखिल की थी। केंद्रीय सूचना आयोग में हाईकोर्ट ने कहा था कि जिला अदालतों के जजों के खिलाफ शिकायतों का रिकॉर्ड लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता।
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हाईकोर्ट के जजों के बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं दी जा सकती है क्योंकि यह सूचना के अधिकार के दायरे में नहीं आती हैं। केंद्रीय सूचना आयोग ने हाईकोर्ट की दलील को अस्वीकार करते हुए हाईकोर्ट को शिकायतों के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। इस आदेश को हाईकोर्ट के ज्वाइंट रजिस्ट्रार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए चुनौती दी है। याचिका में कहा गया कि केंद्रीय सूचना आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर इस प्रकार की जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है। याचिका में केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही याचिका लंबित रहते आदेश पर रोक लगाने की अपील गई है। हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश पर रोक लगाते हुए आयोग व सूचना मांगने वाले वशिष्ठ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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