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हाईकोर्ट ने याची को लगाई फटकार- देश सेवा से पहले अपनी सुविधा देखनी है, छोड़ दो फौज की नौकरी
Wed, 03 Apr 2019 11:39 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 03 Apr 2019 11:39 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने याची को फटकार लगाते हुए टिप्पणी की कि अगर देशसेवा से पहले अपनी सुविधा देखनी है तो फौज की नौकरी छोड़ दो। भारतीय सेना में ड्राईवर व क्लीनर के तौर पर पठानकोट में तैनात कर्मियों की ट्रांसफर के खिलाफ अपील की गई थी।
इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आप भारतीय सेना का हिस्सा हैं, जो अनुशासन के लिए जानी जाती है। आप देश की सेवा कर रहें हैं, लेकिन अगर आपको अपनी सुविधा देखनी है तो नौकरी छोड़ दो, क्योंकि इस स्थिति में हाईकोर्ट के पास उनके लिए कोई सहानुभूति नहीं है।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सभी ने याचिका को वापिस ले लिया। उसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आप भारतीय सेना का हिस्सा हैं, जो अनुशासन के लिए जानी जाती है। आप देश की सेवा कर रहें हैं, लेकिन अगर आपको अपनी सुविधा देखनी है तो नौकरी छोड़ दो, क्योंकि इस स्थिति में हाईकोर्ट के पास उनके लिए कोई सहानुभूति नहीं है।
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हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सभी ने याचिका को वापिस ले लिया। उसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
ये है मामला
निर्मल सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि वे आर्मी के पठानकोट बेस में ड्राइवर व क्लीनर के पद पर काम करते हैं। हाल ही में उनका ट्रांसफर करके विभिन्न स्थानों पर पोस्टिंग के आदेश उन्हें थमा दिए गए, जो सीधे तौर पर 2013 की इंस्ट्रक्शन के खिलाफ हैं। सिंगल बेंच ने याचिका को सीधे तौर पर खारिज कर दिया।
अब सिंगल बेंच के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई तो मामला चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ के समक्ष पहुंचा। यहां याचिका पर सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने याची को फटकार लगाते हुए पूछा कि जब नियुक्ति दी गई थी, तब क्या यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि देश में और यहां तक की देश के बाहर भी ट्रांसफर किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि आर्मी देश की सेवा का पेशा है और इन हालात में जब देश की सीमा पर तनाव की स्थिति है, आप अपने निजी हित देख रहे हैं।
अब सिंगल बेंच के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई तो मामला चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ के समक्ष पहुंचा। यहां याचिका पर सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने याची को फटकार लगाते हुए पूछा कि जब नियुक्ति दी गई थी, तब क्या यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि देश में और यहां तक की देश के बाहर भी ट्रांसफर किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि आर्मी देश की सेवा का पेशा है और इन हालात में जब देश की सीमा पर तनाव की स्थिति है, आप अपने निजी हित देख रहे हैं।