{"_id":"5dbbd7ed8ebc3e0142329415","slug":"punjab-haryana-high-court-statement-in-case-of-rape-survivor-abortion","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट की टिप्पणी- ‘पेट में पलने वाला भ्रूण कोई सुविधा नहीं, जो नहीं चाहिए तो गिरा दें’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट की टिप्पणी- ‘पेट में पलने वाला भ्रूण कोई सुविधा नहीं, जो नहीं चाहिए तो गिरा दें’
Fri, 01 Nov 2019 12:30 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 01 Nov 2019 12:30 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पेट में पलने वाला बच्चा मां की जिम्मेदारी होता है न की कोई सुविधा, जो नहीं चाहिए तो गिराने की अनुमति दे दी जाए। यह टिप्पणी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा गर्भपात के लिए अनुमति हेतू दाखिल याचिका को खारिज करते हुए की है।
चंडीगढ़ निवासी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि अगर उसका बच्चा पैदा हुआ तो वह मानसिक रूप से तनाव में आ जाएगी। महिला ने कहा कि वह बच्चा पैदा करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं है और ऐसे में हाईकोर्ट उसे गर्भपात की अनुमति दे।
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पीजीआई की रिपोर्ट मांगी तो बताया गया कि गर्भ की अवधि 24 सप्ताह से अधिक की है। साथ ही महिला और उसके बच्चे को कोई बीमारी नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि भ्रुण 24 सप्ताह से अधिक का है और गर्भपात की इजाजत नही दी जा सकती।
विज्ञापन
महिला व उसके भ्रुण को किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं है। ऐसे में केवल इस आधार पर की वह बच्चे का बोझ उठाने में मानसिक तौर पर तैयार नहीं है इसलिए गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
चंडीगढ़ निवासी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि अगर उसका बच्चा पैदा हुआ तो वह मानसिक रूप से तनाव में आ जाएगी। महिला ने कहा कि वह बच्चा पैदा करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं है और ऐसे में हाईकोर्ट उसे गर्भपात की अनुमति दे।
विज्ञापन
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पीजीआई की रिपोर्ट मांगी तो बताया गया कि गर्भ की अवधि 24 सप्ताह से अधिक की है। साथ ही महिला और उसके बच्चे को कोई बीमारी नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि भ्रुण 24 सप्ताह से अधिक का है और गर्भपात की इजाजत नही दी जा सकती।
विज्ञापन
महिला व उसके भ्रुण को किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं है। ऐसे में केवल इस आधार पर की वह बच्चे का बोझ उठाने में मानसिक तौर पर तैयार नहीं है इसलिए गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती।