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Highcourt News: दिव्यांग बच्चे को शिक्षा से वंचित करने वाले स्कूल और राज्य सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा-जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 16 Jul 2022 01:30 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार है। स्कूल का कार्य बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाना है और राज्य का काम आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाना। इस कार्य में चाहे कितनी भी मुश्किलें हों, न तो स्कूल और न ही सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग सकती हैं। 

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक दिव्यांग बच्चे को मौलिक शिक्षा के अधिकार से वंचित करने पर पंचकूला के एक निजी स्कूल और हरियाणा सरकार को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की मानसिक स्थिति के आधार पर उसे दोषी बताकर स्कूल व सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते हैं। वे निंदा के पात्र हैं।



याचिका दाखिल करते हुए महिला ने बताया कि उसका 13 साल का बेटा डाउन सिंड्रोम का शिकार है। वह पंचकूला के एक निजी स्कूल की स्पेशल विंग में पिछले 5 साल से पढ़ रहा था। दिव्यांग होने के बावजूद उसने स्पेशल ओलंपिक में रोलर स्केटिंग व तैराकी में राज्य व राष्ट्र स्तर पर मेडल जीते हैं। याची ने बताया कि उसने बेटे के लिए व्यक्तिगत शिक्षण कार्यक्रम की मांग की थी। इसके बाद स्कूल लगातार उसके बेटे के अचानक उग्र होने की शिकायत भेजने लगा। कुछ समय बाद स्कूल ने बाकी बच्चों की सुरक्षा की दलील देते हुए बेटे को स्कूल से निकाल लेने के लिए कहा। याची ने जब इसकी शिकायत दी तो अधिकारियों की कमेटियों ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इन रिपोर्ट में बच्चे को जल्द गुस्सा आने की बात कही गई।


हाईकोर्ट ने स्कूल व सरकार की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार है। स्कूल का कार्य बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाना है और राज्य का काम आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाना। इस कार्य में चाहे कितनी भी मुश्किलें हों, न तो स्कूल और न ही सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग सकती हैं। 

अदालत ने कहा कि पहले दिव्यांग छात्रों को आगे बढ़ने में समस्या आती थी लेकिन आज दौर बदल गया है। कानून भी मौजूद है जो इनके अधिकारों की रक्षा करें। न्यायालय ने अफसोस जताया कि सब कुछ मौजूद होने के बावजूद इसका पूरा लाभ दिव्यांग बच्चों को नहीं मिल पा रहा, क्योंकि जिन्हें इनका पालन करने की जिम्मेदारी दी गई है उनमें संवेदना की कमी है।

स्कूल ने बच्चे को दोषी बताते हुए खुद को बचाने का प्रयास किया

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में स्कूल ने बच्चे को दोषी बताते हुए खुद को बचाने का प्रयास किया। इस प्रयास में राज्य सरकार के अधिकारियों ने जांच के दौरान अफसरशाही वाला रवैया अपनाया और स्कूल का समर्थन किया। कोर्ट ने कहा कि स्कूल व राज्य के कार्य की कड़ी निंदा जरूरी है। चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं उनका समाधान निकाल कर राज्य व स्कूल को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। 

बच्चा जब तक पढ़ेगा, खर्च स्कूल उठाएगा 

हाईकोर्ट ने स्कूल को बच्चे को दाखिला देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की पढ़ाई तीन साल के लिए प्रभावित हुई है, ऐसे में दंड के रूप में जब तक बच्चा स्कूल में पढ़ेगा उसका खर्च स्कूल को उठाना होगा।  

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