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पंचायत चुनावः रिव्यू पिटीशन पंजाब सरकार को नहीं मिली राहत, पिछला फैसला रहेगा बरकरार
Fri, 28 Dec 2018 11:27 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 28 Dec 2018 11:27 AM IST
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कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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पंजाब में पंचायत चुनाव के तहत नामांकन रद्द हुए प्रत्याशियों की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 24 दिसंबर को दिए आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार ने दायर रिव्यू पिटीशन दायर की। राज्य सरकार को इस पर कोई राहत नहीं मिल सकी। जस्टिस तजिंदर सिंह ढींढसा व जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु की खंडपीठ ने पंजाब सरकार की रिव्यू पटीशन पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि जिस खंडपीठ ने आदेश दिए थे, वही खंडपीठ इस रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई कर सकती है। लिहाजा हाईकोर्ट ने सुनवाई 7 जनवरी तक स्थगित कर दी।
हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह व जस्टिस एचएस सेठी की खंडपीठ ने 24 दिसंबर को पंजाब के पंचायत चुनावों में नामांकन रद्द होने के खिलाफ पहुंची एक सौ से अधिक याचिकाओं पर फैसला सुनाया था। इसमें उन्होंने आदेश दिए थे कि सभी याचिकाकर्ता प्रत्याशी अपने नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ संबंधित अथॉरिटी यानी रिटर्निंग अधिकारी को रिप्रेजेंटेशन दें और रिटर्निंग अधिकारी इस रिप्रेजेंटेशन पर 48 घंटों में सुनवाई कर मामलों का निपटारा करें। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कर दिया है कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाए तो उसमें अदालत दखल नहीं दे सकती।
सरकार की ओर से कहा गया कि 24 दिसंबर के आदेश एक तरह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजरंदाज कर दिए गए हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने एक साथ सौ से अधिक याचिकाओं पर यह आदेश दे दिए हैं जबकि पंचायत चुनाव रविवार को होने हैं। इन चुनावों के लिए मतपत्र छप चुके हैं और जिन्होंने अपने नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी, उन्होंने अपनी याचिका की कॉपी तक सरकार को नहीं दी है। ऐसे में यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि किसका नामांकन किस आधार पर रद्द किया गया है। सरकार की ओर से बताया गया कि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का नामांकन रद्द हुआ है।
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ऐसे में महज 48 घंटों में इन सभी की रिप्रेजेंटेशन पर व्यक्तिगत तौर पर सुनवाई का अवसर देकर उनका निपटारा किया जाना काफी कठिन है। अगर इन सभी के मामले में ऐसा किया जाए तो चुनावों को स्थगित करना पड़ेगा। हाईकोर्ट से कहा गया कि ये सभी चुनावी याचिकाएं हैं। ऐसे में इस पर बिना चुनावों को स्थगित किए भी सुनवाई जारी रह सकती है। चुनावी परिणाम इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगे।
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हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह व जस्टिस एचएस सेठी की खंडपीठ ने 24 दिसंबर को पंजाब के पंचायत चुनावों में नामांकन रद्द होने के खिलाफ पहुंची एक सौ से अधिक याचिकाओं पर फैसला सुनाया था। इसमें उन्होंने आदेश दिए थे कि सभी याचिकाकर्ता प्रत्याशी अपने नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ संबंधित अथॉरिटी यानी रिटर्निंग अधिकारी को रिप्रेजेंटेशन दें और रिटर्निंग अधिकारी इस रिप्रेजेंटेशन पर 48 घंटों में सुनवाई कर मामलों का निपटारा करें। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कर दिया है कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाए तो उसमें अदालत दखल नहीं दे सकती।
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सरकार की ओर से कहा गया कि 24 दिसंबर के आदेश एक तरह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजरंदाज कर दिए गए हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने एक साथ सौ से अधिक याचिकाओं पर यह आदेश दे दिए हैं जबकि पंचायत चुनाव रविवार को होने हैं। इन चुनावों के लिए मतपत्र छप चुके हैं और जिन्होंने अपने नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी, उन्होंने अपनी याचिका की कॉपी तक सरकार को नहीं दी है। ऐसे में यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि किसका नामांकन किस आधार पर रद्द किया गया है। सरकार की ओर से बताया गया कि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का नामांकन रद्द हुआ है।
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ऐसे में महज 48 घंटों में इन सभी की रिप्रेजेंटेशन पर व्यक्तिगत तौर पर सुनवाई का अवसर देकर उनका निपटारा किया जाना काफी कठिन है। अगर इन सभी के मामले में ऐसा किया जाए तो चुनावों को स्थगित करना पड़ेगा। हाईकोर्ट से कहा गया कि ये सभी चुनावी याचिकाएं हैं। ऐसे में इस पर बिना चुनावों को स्थगित किए भी सुनवाई जारी रह सकती है। चुनावी परिणाम इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगे।