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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश: सास-ससुर की अर्जित प्रॉपर्टी में बहू की हैसियत लाइसेंसी की
Thu, 17 Mar 2022 10:50 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 17 Mar 2022 10:50 AM IST
सार
महिला ने अपनी याचिका में बताया कि उसका विवाह 2009 में हुआ था और तब से वह गुरुग्राम स्थित आवास में रह रही है। कुछ समय पूर्व उसने घरेलू हिंसा निरोधी अधिनियम के तहत सास-ससुर के खिलाफ केस दर्ज करवाया था।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए एक बहू की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उसने उसे ससुराल से बाहर करने के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि सास-ससुर द्वारा अर्जित संपत्ति में उसकी भूमिका लाइसेंसी की है। गुरुग्राम केडीसी का मकान खाली करने का आदेश सही है।
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महिला ने अपनी याचिका में बताया कि उसका विवाह 2009 में हुआ था और तब से वह गुरुग्राम स्थित आवास में रह रही है। कुछ समय पूर्व उसने घरेलू हिंसा निरोधी अधिनियम के तहत सास-ससुर के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। इसके बाद याची के पति ने अपने माता-पिता के साथ मिलीभगत कर मेंटेनेंस ऑफ पैरेंट्स एंड वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत गुरुग्राम के डीसी को शिकायत दे दी। गुरुग्राम के डीसी ने याची के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उसे मकान खाली करने का आदेश दे दिया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत में घरेलू हिंसा को लेकर दर्ज मामले में कोर्ट ने याची को ससुराल में रहने का अधिकार नहीं दिया। इस फैसले के खिलाफ याची ने अपील नहीं की तो यह अंतिम फैसला हो गया। साथ ही वह मकान याची के सास- ससुर द्वारा अर्जित की गई संपत्ति में उसका दर्जा लाइसेंसी का है और याची के कृत्य ने लाइसेंस को समाप्त कर दिया। ऐसे में याची उस मकान में रहने का दावा नहीं कर सकती है।
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