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हाईकोर्ट ने पूछा- एमडी/एमएस में दाखिले के लिए इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस पर क्यों न लगा दें रोक
Wed, 17 Jun 2020 09:54 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 17 Jun 2020 09:54 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज के एमडी/एमएस/पीजी डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के लिए स्टेट कोटे की सामान्य और शारीरिक अक्षम की सभी सीटों पर इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस देने को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार, बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को 26 जून के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है, साथ ही पूछा है कि बताओ क्यों न इस पर रोक लगा दी जाए।
मोगा के डॉ शुभम मित्तल द्वारा एडवोकेट आईपीएस कोहली के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने पंजाब के मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के सचिव को विशेष तौर पर हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया कि वह बताएं की कैसे तय सिद्धांत का उल्लंघन कर स्टेट कोटे की सभी सामान्य और शारीरिक अक्षम वर्ग की सीटों पर इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस के तहत दाखिले का नियम बनाया गया है।
इस मामले को लेकर दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया है कि बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ने अपने से एफिलिएटेड सरकारी और निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमडी/एमएस/पीजी डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के लिए नियम बनाए हैं।
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मोगा के डॉ शुभम मित्तल द्वारा एडवोकेट आईपीएस कोहली के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने पंजाब के मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के सचिव को विशेष तौर पर हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया कि वह बताएं की कैसे तय सिद्धांत का उल्लंघन कर स्टेट कोटे की सभी सामान्य और शारीरिक अक्षम वर्ग की सीटों पर इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस के तहत दाखिले का नियम बनाया गया है।
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इस मामले को लेकर दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया है कि बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ने अपने से एफिलिएटेड सरकारी और निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमडी/एमएस/पीजी डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के लिए नियम बनाए हैं।
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ये है नियम
नियमों के अनुसार, कुल सीटों की 50 प्रतिशत सीटें आल इंडिया कोटे के तहत भरी जाती हैं बाकी 50 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटे की होती हैं। इसमें से सामान्य वर्ग की 60 प्रतिशत, अनुसूचित जाति वर्ग की 25 प्रतिशत, पिछड़े वर्ग की 10 प्रतिशत और शारीरिक अक्षम वर्ग की 5 प्रतिशत सीटें तय की गई हैं।
लेकिन इसमें से सामान्य वर्ग और शारीरिक अक्षम वर्ग की सभी सीटों पर इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस से भरे जाने का प्रावधान बना दिया गया है। यानी जिन आवेदकों ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से अपनी क्वालीफाइंग परीक्षा पास की है उन्हें दाखिले में तरजीह दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने भी शत प्रतिशत इंस्टीयूशनल कोटे को स्वीकार नहीं किया
एडवोकेट आईपीएस कोहली ने कहा कि यह सीधे तौर पर गलत है कि इस इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस के तहत बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के आवेदकों को अन्य यूनिवर्सिटी से क्वालीफाइंग परीक्षा पास करने वालों से वरीयता दी जाएगी। इस तरह तो अन्य यूनिवर्सिटी के आवेदकों को इस कोर्स में दाखिले का रास्ता ही बंद कर दिया है, जबकि हाईकोर्ट ने भी शत प्रतिशत इंस्टीयूशनल कोटे को स्वीकार नहीं किया है।
लेकिन इसमें से सामान्य वर्ग और शारीरिक अक्षम वर्ग की सभी सीटों पर इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस से भरे जाने का प्रावधान बना दिया गया है। यानी जिन आवेदकों ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से अपनी क्वालीफाइंग परीक्षा पास की है उन्हें दाखिले में तरजीह दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने भी शत प्रतिशत इंस्टीयूशनल कोटे को स्वीकार नहीं किया
एडवोकेट आईपीएस कोहली ने कहा कि यह सीधे तौर पर गलत है कि इस इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस के तहत बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के आवेदकों को अन्य यूनिवर्सिटी से क्वालीफाइंग परीक्षा पास करने वालों से वरीयता दी जाएगी। इस तरह तो अन्य यूनिवर्सिटी के आवेदकों को इस कोर्स में दाखिले का रास्ता ही बंद कर दिया है, जबकि हाईकोर्ट ने भी शत प्रतिशत इंस्टीयूशनल कोटे को स्वीकार नहीं किया है।