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हाईकोर्ट का आदेश- ‘शादी के बाद एक्सटेंशन लेक्चरर के स्टेशन बदलने की नीति पर विचार करें’
Thu, 10 Sep 2020 01:22 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 10 Sep 2020 01:22 PM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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एक्सटेंशन लेक्चरर के तौर पर कार्यरत लड़कियों को विवाह की स्थिति में अपनी सेवा का स्थान बदलने की अनुमति से जुड़ी नीति बनाने पर निर्णय लेने के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को दो सप्ताह की मोहलत दी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि हमारे समाज में लड़कियों की शादी को प्राथमिकता के तौर पर देखा जाता है और ज्यादातर कार्यरत एक्सटेंशन लेक्चरर की शादी होने वाली है। ऐसे में उन्हें ससुराल का स्टेशन देने की स्थिति पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।
याचिका दाखिल करते हुए शीलू कुमारी ने कहा कि वह भिवानी के कॉलेज में एक्सटेंशन लेक्चरर के तौर पर कार्यरत है। उसका विवाह गुरुग्राम में हुआ है और उसका ससुराल पक्ष वहीं पर रहता है। हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की नीति के अनुसार एक्सटेंशन लेक्चरर विवाह के बाद अपने कार्य स्थान को बदलने का अधिकार नहीं रखते हैं न ही उनके आवेदन पर गौर किया जाता है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्तमान में यदि कोई लड़की एक्सटेंशन लेक्चरर के तौर पर कार्यरत है और उसका विवाह हो जाता है तो उसके पास नौकरी से त्यागपत्र देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता है। शीलू ने उच्च न्यायालय से अपील की है कि हरियाणा सरकार द्वारा एक्सटेंशन लेक्चरर को लेकर नीति में इस संदर्भ में आवश्यक निर्णय लेने का निर्देश दे। उच्च न्यायालय ने याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि हमारा समाज एक ऐसा समाज है जहां पर लड़की को विवाह करने के बाद ससुराल में जाकर रहना पड़ता है।
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ऐसी स्थिति में यदि उसके पास नौकरी से त्यागपत्र देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं रहेगा तो यह सही नहीं होगा। उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि एक्सटेंशन लेक्चरर के मामले में लड़कियों की विवाह की स्थिति में यदि जहां पर उनका विवाह हुआ है वहां पर अवसर मौजूद है तो उसे नौकरी की अनुमति देने पर नीति में प्रावधान करने का निर्णय लें। उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकारी नौकरी होने पर दंपती को एक स्थान पर नियुक्ति देने का प्रावधान है तो एक्सटेंशन लेक्चरर की स्थिति में लड़कियों को ससुराल के पास के स्थान पर नियुक्ति देने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।
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याचिका दाखिल करते हुए शीलू कुमारी ने कहा कि वह भिवानी के कॉलेज में एक्सटेंशन लेक्चरर के तौर पर कार्यरत है। उसका विवाह गुरुग्राम में हुआ है और उसका ससुराल पक्ष वहीं पर रहता है। हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की नीति के अनुसार एक्सटेंशन लेक्चरर विवाह के बाद अपने कार्य स्थान को बदलने का अधिकार नहीं रखते हैं न ही उनके आवेदन पर गौर किया जाता है।
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याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्तमान में यदि कोई लड़की एक्सटेंशन लेक्चरर के तौर पर कार्यरत है और उसका विवाह हो जाता है तो उसके पास नौकरी से त्यागपत्र देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता है। शीलू ने उच्च न्यायालय से अपील की है कि हरियाणा सरकार द्वारा एक्सटेंशन लेक्चरर को लेकर नीति में इस संदर्भ में आवश्यक निर्णय लेने का निर्देश दे। उच्च न्यायालय ने याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि हमारा समाज एक ऐसा समाज है जहां पर लड़की को विवाह करने के बाद ससुराल में जाकर रहना पड़ता है।
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ऐसी स्थिति में यदि उसके पास नौकरी से त्यागपत्र देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं रहेगा तो यह सही नहीं होगा। उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि एक्सटेंशन लेक्चरर के मामले में लड़कियों की विवाह की स्थिति में यदि जहां पर उनका विवाह हुआ है वहां पर अवसर मौजूद है तो उसे नौकरी की अनुमति देने पर नीति में प्रावधान करने का निर्णय लें। उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकारी नौकरी होने पर दंपती को एक स्थान पर नियुक्ति देने का प्रावधान है तो एक्सटेंशन लेक्चरर की स्थिति में लड़कियों को ससुराल के पास के स्थान पर नियुक्ति देने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।