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हाईकोर्ट का फरमानः बच्चों के हत्यारे के लिए मौत से कम कुछ नहीं, बरकरार रहेगी फांसी की सजा

Fri, 26 Apr 2019 11:01 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 26 Apr 2019 11:01 AM IST
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Punjab Haryana High Court Order to Continue Death Panelty of Childrens Murderer Khushwant Singh
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बस्सी पठाना के दो मासूम बच्चों समेत चार लोगों की हत्या के दोषी खुशविंदर सिंह की याचिका खारिज करते हुए उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी है। सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा के खिलाफ अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मासूम बच्चों के हत्यारे के लिए मौत से कम सजा कोई नहीं है।
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इस मामले में सीबीआई द्वारा की गई जांच ने भी बेहद अहम भूमिका निभाई है। सीबीआई ने इस मामले में पूर्व में बनाए आरोपियों को बरी कर बाद में वास्तविक हत्यारे को सजा दिलवाई थी। खुशविंदर सिंह ने पहले वर्ष 2004 में कुलवंत सिंह व उसकी पत्नी सहित उनके दो मासूम बच्चों रमनदीप कौर और अरविंदर सिंह की हत्या की थी।
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इस केस में पहले मृतक कुलवंत के भाई पर ही हत्या के आरोप लगाए गए थे। लेकिन सीबीआई जांच में उनके खिलाफ कुछ नहीं मिल पाया तो एजेंसी ने मामले में सितंबर 2009 में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी थी। इस रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार भी कर लिया था।
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ऐसे हुआ मामले का खुलासा

हत्या के दोषी का तब खुलासा हुआ, जब उसने ठीक पहले की तरह ही एक बार फिर जून 2012 में भी 5 लोगों हत्या कर दी। लेकिन उसमें से एक महिला बच निकली और उसने पुलिस को खुशविंदर के बारे में बताया था। पुलिस जांच में खुशविंदर ने स्वीकार किया था कि उसने पहले भी वर्ष 2004 में इसी तरह से चार लोगों की हत्या की थी।

इस खुलासे के बाद पंजाब के एडीजीपी (क्राइम) ने सीबीआई को इसकी जानकारी दी। सीबीआई ने दोबारा अदालत से इस केस को खोलने की मांग की, जिसके बाद सीबीआई जांच में खुशविंदर सिंह को हत्याकांड में दोषी करार देकर गत वर्ष अक्तूबर में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस सजा पर अब हाईकोर्ट ने भी अपनी मोहर लगा दी है।

तांत्रिक क्रियाओं का हवाला देकर नहर में धकेल की थी हत्याएं
खुशविंदर सिंह ने बड़े ही हैरतंगेज तरीके से इन हत्याओं को अंजाम दिया था। दोनों मामलों में मृतकों को लालच दिया गया था कि वह उनके व्यवसाय में हो रहे नुकसान को एक बाबा की मदद से लाभ में बदल देंगे। वर्ष 2004 में मृतक कुलवंत सिंह ने कुछ ही दिन पहले जो जमीन बेचीं थी। उसके बदले में मिले 14 लाख रुपये भी उसे साथ ले जाने को कहा था, ताकि बाबा इन पैसों पर मंत्र पढ़ सकें।

भाखड़ा नहर के पास पहुंचने पर उन्हें नहर के सामने आंखे बंद कर मंत्र पढ़ने को कहा गया। जब पूरा परिवार आंखे बंद कर मंत्र पढ़ने लगा तो उन्हें नहर में धकेल दिया गया, जिसमे पूरे परिवार की मौत हो गई थी। इसी तरह वर्ष 2012 के दूसरे मामले में भी दोषी ने यही किया, लेकिन इस बार परिवार की एक महिला बच गई  जिसके बयानों पर ही खुशविंदर को पकड़ा गया और उसने बाद में वर्ष 2004 में की गई हत्याओं को भी कबूल कर लिया।
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