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आदेशः अंगों के इंतजार में किसी की जान न जाए, पीजीआई की 16 सिफारिशों को प्रावधान बनाएं
Thu, 31 Oct 2019 12:16 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 31 Oct 2019 12:16 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि अंगों के इंतजार में किसी की जान नहीं जानी चाहिए। कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व केंद्र सरकार को अंग-प्रत्यारोपण के नियमों को सरल बनाने के लिए पीजीआई की 16 सिफारिशों को लागू करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर ही पीजीआई के विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी ने यह सुझाव दिए थे जिन्हें अब प्रावधान बनाने के आदेश दिए गए हैं। कमेटी ने कहा था कि अंग-प्रत्यारोपण के नियमों को सरल बनाने के साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह व्यापार न बन जाए।
पीजीआई चंडीगढ़ के 9 विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि भारत में प्रतिवर्ष 2 हजार से अधिक लोग चंद पैसों के लिए अंग दान कर देते हैं। अंगदान प्रक्रिया को इस प्रकार सरल बनाना चाहिए कि यह जनहित के लिए हो न कि इसका व्यापार की तरह इस्तेमाल हो। सुझाव दिया गया कि चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के सभी अस्पतालों में ब्रेन डेड मरीजों को सर्टिफिकेट जारी किया जाए और इनका रिकॉर्ड रखा जाए। जैसे तमिलनाडु ने जिला स्तरीय कमेटी बनाकर केंद्र सरकार की सहायता से काउंसलरों की नियुक्ति की है।
उसी तर्ज पर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में भी जिला स्तर पर ऐसी कमेटियों का गठन किया जाना चाहिए ताकि काउंसलर ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों और रिश्तेदारों को उनकी सहमति से अंगदान के लिए प्रेरित कर सकें। काउंसलरों को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के ब्रेन डेड मरीजों के रिश्तेदारों से संपर्क करने का मौका दिया जाना चाहिए। अंग-प्रत्यारोपण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के बारे में सभी जांच अधिकारी और एसएचओ को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए ताकि अंगदान प्रक्रिया में देरी न हो।
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अंग-प्रत्यारोपण के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया है और पंजाब और हरियाणा का एक भी अस्पताल इसके लिए रजिस्टर नहीं है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि कम से कम 25 बेड के अस्पताल, जहां आईसीयू और अच्छे ऑपरेशन थिएटर हैं उनका अंग प्रत्यारोपण के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाए।
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पीजीआई चंडीगढ़ के 9 विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि भारत में प्रतिवर्ष 2 हजार से अधिक लोग चंद पैसों के लिए अंग दान कर देते हैं। अंगदान प्रक्रिया को इस प्रकार सरल बनाना चाहिए कि यह जनहित के लिए हो न कि इसका व्यापार की तरह इस्तेमाल हो। सुझाव दिया गया कि चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के सभी अस्पतालों में ब्रेन डेड मरीजों को सर्टिफिकेट जारी किया जाए और इनका रिकॉर्ड रखा जाए। जैसे तमिलनाडु ने जिला स्तरीय कमेटी बनाकर केंद्र सरकार की सहायता से काउंसलरों की नियुक्ति की है।
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उसी तर्ज पर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में भी जिला स्तर पर ऐसी कमेटियों का गठन किया जाना चाहिए ताकि काउंसलर ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों और रिश्तेदारों को उनकी सहमति से अंगदान के लिए प्रेरित कर सकें। काउंसलरों को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के ब्रेन डेड मरीजों के रिश्तेदारों से संपर्क करने का मौका दिया जाना चाहिए। अंग-प्रत्यारोपण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के बारे में सभी जांच अधिकारी और एसएचओ को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए ताकि अंगदान प्रक्रिया में देरी न हो।
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अंग-प्रत्यारोपण के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया है और पंजाब और हरियाणा का एक भी अस्पताल इसके लिए रजिस्टर नहीं है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि कम से कम 25 बेड के अस्पताल, जहां आईसीयू और अच्छे ऑपरेशन थिएटर हैं उनका अंग प्रत्यारोपण के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाए।
विद्यार्थियों को जागरूक किया जाए
बताया गया कि तमिलनाडू सरकार अंग दान करने वाले को 70 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देती है। ठीक इसी तर्ज पर पंजाब और हरियाणा में भी काम किया जाना चाहिए। इसके साथ ही स्कूलों में 10वीं, 11वीं और 12वीं में छात्रों को अंगदान और अंग-प्रत्यारोपण के प्रति छात्रों को जागरूक किया जाए।
धार्मिक संगठन पढ़ाएंगे अंगदान का पाठ
कमेटी ने सुझाव दिया था कि देश में अभी भी लोग अंगदान के प्रति जागरूक नहीं है। इसके प्रति धार्मिक संस्थानों व गैर सरकारी संस्थाओं का सहयोग लिया जाना भी जरूरी है। दोनों प्रकार के संगठन आम लोगों और अपने साथ जुड़े समर्थकों को अंगदान के लिए प्रेरित कर सकते हैं। अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को मिटाने के लिए धार्मिक संगठनों का सहयोग बेहद जरूरी है। वे लोगों को समझा सकते हैं कि अंगदान से कोई नुकसान नहीं होता बल्कि यह लोगों के कल्याण के लिए एक बेहतर पहल है।
धार्मिक संगठन पढ़ाएंगे अंगदान का पाठ
कमेटी ने सुझाव दिया था कि देश में अभी भी लोग अंगदान के प्रति जागरूक नहीं है। इसके प्रति धार्मिक संस्थानों व गैर सरकारी संस्थाओं का सहयोग लिया जाना भी जरूरी है। दोनों प्रकार के संगठन आम लोगों और अपने साथ जुड़े समर्थकों को अंगदान के लिए प्रेरित कर सकते हैं। अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को मिटाने के लिए धार्मिक संगठनों का सहयोग बेहद जरूरी है। वे लोगों को समझा सकते हैं कि अंगदान से कोई नुकसान नहीं होता बल्कि यह लोगों के कल्याण के लिए एक बेहतर पहल है।