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चंडीगढ़ : पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किया साफ- पिता के पास बेटे की मौजूदगी को नहीं माना जा सकता अवैध हिरासत

Thu, 21 Apr 2022 01:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 21 Apr 2022 01:37 AM IST
सार

महिला ने पति और ससुराल के लोगों पर उसके बच्चे को अवैध तरीके से रखने का आरोप लगाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। जालंधर निवासी याची महिला पूनम कलसी ने कहा था कि उसके पति व ससुराल वाले जबरदस्ती उसके 3 साल के बेटे को अपने साथ लेकर गए हैं। पति और ससुराल वालों के पास वह सुरक्षित नहीं है क्योंकि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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Punjab-Haryana High Court made it clear that the presence of the son with the father cannot be considered as illegal custody
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बच्चे को अवैध तरीके से पिता द्वारा रखे जाने की दलील देकर उसे छुड़ाने के लिए मां की ओर से दाखिल याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पिता के पास बेटे की मौजूदगी को अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता। इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका मान्य नहीं है।

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महिला ने पति और ससुराल के लोगों पर उसके बच्चे को अवैध तरीके से रखने का आरोप लगाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। जालंधर निवासी याची महिला पूनम कलसी ने कहा था कि उसके पति व ससुराल वाले जबरदस्ती उसके 3 साल के बेटे को अपने साथ लेकर गए हैं।
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पति और ससुराल वालों के पास वह सुरक्षित नहीं है क्योंकि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि वारंट ऑफिसर नियुक्त किया जाए ताकि याची के बच्चे को उसके पति और ससुराल वालों की अवैध हिरासत से छुड़ाया जा सके। 
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याची के पति व ससुराल वालों ने कहा कि यह मामला गार्जियन एंड वार्ड एक्ट के तहत याचिका दाखिल कर सुलझाया जा सकता था, लेकिन याची ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर दी जो मान्य नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग बच्चे पर माता या पिता किसी का भी अंतिम अधिकार नहीं होता है।


इस प्रकार के मामलों में सबसे पहले यह देखा जाता है कि बच्चे का हित किसके साथ रहने में ज्यादा है। हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुए याची को छूट दी कि वह इस मांग को लेकर संबंधित अदालत में याचिका दायर कर सकती हैं।

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