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फैसलाः हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के गठन का आदेश वापस लेने तक वकील रखेंगे कामकाज ठप
Sat, 27 Jul 2019 10:07 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 27 Jul 2019 10:07 AM IST
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वकील
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल गठित करने का फैसला वापस लिए जाने तक पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन कामकाज ठप रखेगी। वकीलों ने शुक्रवार को भी कामकाज पूरी तरह से ठप रखा। शुक्रवार को बार रूम में एसोसिएशन की आम बैठक हुई जिसमें कहा गया कि ट्रिब्यूनल को गठित कर सरकार वकीलों से उनका कामकाज छीनने की कोशिश कर रही है। इस दौरान यह ऐलान किया गया कि जब तक हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल गठित करने के फैसले को सरकार वापस नहीं लेती तब तक वकील काम पर नहीं लौटेंगे।
वकीलों का कहना है कि ट्रिब्यूनल गठित कर उसमे एक रिटायर्ड जज को नियुक्त कर दिया है, जबकि इस ट्रिब्यूनल के पास प्रशासनिक अधिकारियों के केस जाएंगे जिनकी अब तक हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इस तरह ट्रिब्यूनल इतनी बड़ी संख्या में कैसे केसों का समय पर निपटारा कर पाएगा। कहा गया कि हाईकोर्ट में रोजाना 200 के करीब सर्विस के मामले आते हैं, जिनको सुनने की जिम्मेदारी तीन से चार जजों को दी जाती है। कैसे एक रिटायर जज इन सभी मामलों को सुन पाएंगी और इनका निपटारा कर पाएंगी।
इस दौरान कहा गया कि इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन पावर पर इतना खर्च करने के स्थान पर हाईकोर्ट में जजों के रिक्त पदों को भरना चाहिए और हाईकोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करना चाहिए। इस दौरान यह फैसला लिया गया कि ट्रिब्यूनल के गठन को अब याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। सोमवार को इस ट्रिब्यूनल के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी जाएगी और वकील अनिश्चित काल तक कामकाज ठप रखेंगे।
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तीन वर्षों की प्रक्रिया के बाद गठित किया गया है ट्रिब्यूनल
हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन ने कहा कि ऐसा नहीं है कि इस ट्रिब्यूनल को गठित किये जाने का फैसला एक दम से लिया गया है। तीन वर्षों की प्रक्रिया के बाद और विधान सभा में स्वीकृति के बाद ही इसका गठन किया गया है। अब तो ट्रिब्यूनल में चेयरपर्सन की नियुक्ति भी की जा चुकी हैं। अब इसे रोका नहीं जा सकता है।
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वकीलों का कहना है कि ट्रिब्यूनल गठित कर उसमे एक रिटायर्ड जज को नियुक्त कर दिया है, जबकि इस ट्रिब्यूनल के पास प्रशासनिक अधिकारियों के केस जाएंगे जिनकी अब तक हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इस तरह ट्रिब्यूनल इतनी बड़ी संख्या में कैसे केसों का समय पर निपटारा कर पाएगा। कहा गया कि हाईकोर्ट में रोजाना 200 के करीब सर्विस के मामले आते हैं, जिनको सुनने की जिम्मेदारी तीन से चार जजों को दी जाती है। कैसे एक रिटायर जज इन सभी मामलों को सुन पाएंगी और इनका निपटारा कर पाएंगी।
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इस दौरान कहा गया कि इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन पावर पर इतना खर्च करने के स्थान पर हाईकोर्ट में जजों के रिक्त पदों को भरना चाहिए और हाईकोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करना चाहिए। इस दौरान यह फैसला लिया गया कि ट्रिब्यूनल के गठन को अब याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। सोमवार को इस ट्रिब्यूनल के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी जाएगी और वकील अनिश्चित काल तक कामकाज ठप रखेंगे।
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तीन वर्षों की प्रक्रिया के बाद गठित किया गया है ट्रिब्यूनल
हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन ने कहा कि ऐसा नहीं है कि इस ट्रिब्यूनल को गठित किये जाने का फैसला एक दम से लिया गया है। तीन वर्षों की प्रक्रिया के बाद और विधान सभा में स्वीकृति के बाद ही इसका गठन किया गया है। अब तो ट्रिब्यूनल में चेयरपर्सन की नियुक्ति भी की जा चुकी हैं। अब इसे रोका नहीं जा सकता है।