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हाईकोर्ट का फरमान- कर्मी की रिटायरमेंट नजदीक हो तो भी वेतन अनुसार निर्धारित होगा मुआवजा

Tue, 07 Apr 2020 12:12 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 07 Apr 2020 12:12 PM IST
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Punjab Haryana High Court Judgement in Compansation Case of Insurance Company Employee
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
बीमा कंपनी द्वारा मृतक की रिटायरमेंट नजदीक होने के चलते आधा क्लेम वेतन के अनुसार तथा आधा क्लेम पेंशन के अनुसार निर्धारित करने की अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि भले ही मृतक की रिटायरमेंट नजदीक थी, लेकिन स्प्लिट मल्टीप्लायर इस्तेमाल कर क्लेम को दो हिस्सों में निर्धारित नहीं किया जा सकता। कंपनी को क्लेम वेतन के अनुसार ही देना होगा।
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मोहाली निवासी सुखविंदर सिंह अपने घर की ओर आ रहे थे कि अचानक कार ने उन्हें टक्कर मार दी उनकी मौके पर मौत हो गई। इसके बाद मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की गई। याचिका पर ट्रिब्यूनल ने 29,17000 रुपये का क्लेम निर्धारित किया। इसके खिलाफ बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि मृतक की आयु एक्सीडेंट के समय 53 साल थी और वे जल्द ही रिटायर होने वाले था।
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ऐसे में उनकी रिटायरमेंट तक वेतन के अनुसार तथा रिटायरमेंट के बाद पेंशन के आधार पर मुआवजा दिया जाए। कोर्ट ने याचिका को खरिज करते हुए कहा कि एक व्यक्ति के जीवन का मूल्य पैसे से नहीं लगाया जा सकता। हालांकि व्यक्ति के उसके परिवार के प्रति दायित्वों को ध्यान में रखना जरूरी है। घर का मुखिया रिटायरमेंट के बाद भी मुखिया ही रहता है और उसकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति के पास अनुभव भी होता है और रीएंपलॉयमेंट का मौका भी।
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ऐसे में स्प्लिट मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने की दलील नहीं मानी जा सकती है। रिटायरमेंट होने से व्यक्ति की परिवार के प्रति जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती बल्कि वह अपने परिवार के लिए और अधिक करने में सक्षम होता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का फैसला बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी की याचिका खारिज कर दी।
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