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डीजीपी के जवाब पर हाईकोर्ट की टिप्पणी- गोमांस तस्करी, अपराध रोकना पुलिस के बस से बाहर

Sat, 06 Apr 2019 09:31 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 06 Apr 2019 09:31 AM IST
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Punjab Haryana High Court Judge Statement in Counter of Haryana DGP Reply
सांकेतिक तस्वीर
डीजीपी ने ऐसा जवाब दिया कि हाईकोर्ट के जज ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि गोमांस तस्करी और अपराध रोकना पुलिस के बस की बात नहीं है। लोगों की रक्षा करने की जिम्मेदारी जिस पुलिस पर है, उस पुलिस पर ही हमेशा जान जाने का खतरा बना रहता है। यह बात कोई और नहीं, बल्कि डीजीपी हरियाणा ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में बताई है। डीजीपी के इस रुख पर हाईकोर्ट ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि गोमांस की तस्करी और अपराध पर नियंत्रण करना पुलिस के बस के बाहर है।
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याचिका दाखिल करते हुए मेवात के नूंह निवासी इजराइल ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की थी। वर्ष 2017 में उसके खिलाफ हरियाणा गोवंश संरक्षण व संवर्धन एक्ट-2015 और पशु क्रूरता एक्ट- 1960 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने डीजीपी को तलब किया और पूछा कि पुलिस को पहले से ही खुफिया सूचना मिल जाती है। बावजूद इसके ज्यादातर मामलों में आरोपी कैसे मौके से फरार होने में कामयाब हो जाते हैं।
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हाईकोर्ट ने पूछा कि इस एक्ट के तहत मेवात में कितनी एफआईआर दर्ज हुईं, कितने मामलों में आरोपी पुलिस की मौजूदगी में फरार हुए। कितने आरोपी फरार हैं, कितने आरोपियों को सजा हुई है और कितने बरी हुए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप डीजीपी हाजिर हुए और हलफनामा दाखिल किया। हाईकोर्ट ने हलफनामे को देखकर कहा कि इसे पढ़कर स्थिति स्पष्ट हो गई है। गो तस्कर हार्डकोर अपराधी हैं, जो पूरी तरह से ट्रेंड हैं।
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इस पर डीजीपी ने कहा कि जब पुलिस तस्करों को रोकती है तो वे उन पर फायरिंग करने लगते हैं। पुलिस पर फायरिंग के मामले में 30 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। ऐसे में पुलिस वालों की जान को हमेशा खतना बना रहता है।

गौ तस्करी से जुड़े आंकड़े हैरान करने वाले

हाईकोर्ट को बताया गया कि नूंह में अब तक गौ तस्करी के मामलों में 792 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें 2156 आरोपी हैं। इनमें से 1194 को गिरफ्तार किया गया है। केवल 236 आरोपी को मौके से गिरफ्तार किया गया है, बाकी 958 को बाद में।

आंकड़ों पर गौर करें तो 96 मामलों में मौके पर गिरफ्तारी हुई है और बाकी 696 मामलों में आरोपी फरार होने में कामयाब रहे। अभी तक 386 मामलों में 856 लोगों को गिरफ्तार किया जाना बाकी है। पुलिस ने अब तक 103 लोगों को प्रो क्लेम ऑफेंडर घोषित किया है।

792 एफआईआर में से केवल 13 में आया कोर्ट का फैसला
हरियाणा गोवंश संरक्षण व संवर्धन एक्ट-2015 के अधार पर गोमांस तस्करी के लिए दर्ज की गई 792 एफआईआर में से केवल 13 में कोर्ट का फैसला आया है और सभी आरोपी बरी कर दिए गए। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रवैया अपनाते हुए कहा कि यह प्रोसिक्यूशन और पुलिस की कमी को उजागर करता है।

हाईकोर्ट ने डीपीजी हरियाणा और एडवोकेट जनरल हरियाणा को आदेश दिए कि इन 13 मामलों में कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर यह देखें कि आखिर क्या कारण थे जो आरोपी बरी हो गए। कोर्ट ने कहा कि अभी इस समस्या का समाधान जरूरी है, वरना कानून व्यवस्था के लिहाज से बहुत देर हो जाएगी।
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