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पंचायती समझौते से खत्म नहीं हो जाते कानूनी अधिकार, विधवा ने दोबारा शादी की तो भी मुआवजे की हकदार
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Nov 2018 09:02 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि पंचायती समझौते से कानूनी अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
रेलवे एक्सीडेंट के एक मामले में हाईकोर्ट ने मृतक के परिजनों को मुआवजा जारी करने के आदेश देते हुए इस राशि का एक हिस्सा मृतक की पत्नी को भी जारी करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट को बताया गया था कि नारायणगढ़ निवासी मृतक की पत्नी ने पंचायती समझौता किया था कि वह पति की मौत के बाद मायके में रहना चाहती है और अब उसका ससुराल से कोई लेना-देना नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे समझौते से किसी के कानूनी अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता। पति की मौत के कारण ही पत्नी को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और इससे उसकी जिंदगी भी प्रभावित हुई। ऐसे में वह मुआवजे की निश्चित तौर पर हकदार है।
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रेलवे एक्सीडेंट के एक मामले में हाईकोर्ट ने मृतक के परिजनों को मुआवजा जारी करने के आदेश देते हुए इस राशि का एक हिस्सा मृतक की पत्नी को भी जारी करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट को बताया गया था कि नारायणगढ़ निवासी मृतक की पत्नी ने पंचायती समझौता किया था कि वह पति की मौत के बाद मायके में रहना चाहती है और अब उसका ससुराल से कोई लेना-देना नहीं होगा।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसे समझौते से किसी के कानूनी अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता। पति की मौत के कारण ही पत्नी को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और इससे उसकी जिंदगी भी प्रभावित हुई। ऐसे में वह मुआवजे की निश्चित तौर पर हकदार है।
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याचिका दाखिल करते हुए मृतक के परिजनों ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी थी जिसने मृतक की जेब में टिकट न मिलने के चलते उसे यात्री मानने से इनकार कर दिया था।
याचिका हाईकोर्ट पहुंची तो हाईकोर्ट ने कहा कि केवल टिकट न मिलना यह साबित नहीं करता कि मृतक रेल यात्रा नहीं कर रहा था। याची के अनुसार नारायणगढ़ निवासी कृष्ण कुमार वैष्णो देवी दर्शन के लिए निकला था और रास्ते में अंबाला में गाड़ी से नीचे गिरकर उसकी मौत हो गई।
कोर्ट ने कहा कि मृतक की जेब से पैसे भी नहीं मिले और यह आशंका पैदा करता है कि डेड बॉडी से पैसे चुराते हुए टिकट भी गिर गया होगा। कोर्ट ने कहा कि मृतक के परिजन निश्चित तौर पर मुआवजे के हकदार हैं। कोर्ट ने इस राशि में मृतक की पत्नी जो दोबारा शादि कर चुकी है उसे भी हिस्सा देने के आदेश दिए हैं।
याचिका हाईकोर्ट पहुंची तो हाईकोर्ट ने कहा कि केवल टिकट न मिलना यह साबित नहीं करता कि मृतक रेल यात्रा नहीं कर रहा था। याची के अनुसार नारायणगढ़ निवासी कृष्ण कुमार वैष्णो देवी दर्शन के लिए निकला था और रास्ते में अंबाला में गाड़ी से नीचे गिरकर उसकी मौत हो गई।
कोर्ट ने कहा कि मृतक की जेब से पैसे भी नहीं मिले और यह आशंका पैदा करता है कि डेड बॉडी से पैसे चुराते हुए टिकट भी गिर गया होगा। कोर्ट ने कहा कि मृतक के परिजन निश्चित तौर पर मुआवजे के हकदार हैं। कोर्ट ने इस राशि में मृतक की पत्नी जो दोबारा शादि कर चुकी है उसे भी हिस्सा देने के आदेश दिए हैं।