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वैवाहिक विवाद में पीड़िता ने की जज बदलने की मांग, हाई कोर्ट ने कहा- यह मुख्य न्यायाधीश के कार्य में दखल
Sat, 06 Feb 2021 11:53 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 06 Feb 2021 11:53 AM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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जज पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए केस दूसरे जज को ट्रांसफर करने के मांगपत्र पर चीफ जस्टिस को प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने का आदेश जारी करने की अपील पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा करना मुख्य न्यायधीश के कार्य में दखल देना होगा।
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गुरुग्राम निवासी रिचा सिंह का वैवाहिक विवाद का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले की सुनवाई कर रहे जज पर याची ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर केस किसी अन्य जज को भेजने की मांग जनवरी 2020 में की थी। इस मांगपत्र पर प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा निर्णय न लिए जाने पर याची ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दाखिल की थी। सिंगल बेंच से अपील की गई थी कि मुख्य न्यायाधीश को आदेश दिया जाए कि वे प्रशासनिक स्तर पर याची के मांगपत्र पर निर्णय लें।
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सिंगल बेंच ने याचिका को सुनवाई के लिए अनुपयुक्त मानते हुए खारिज कर दिया था। सिंगल बेंच के आदेश को याची ने खंडपीठ में चुनौती दी। याची की मांग को खंडपीठ ने सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस जसवंत सिंह की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कौन सा केस कौन सुनेगा यह मुख्य न्यायाधीश तय करते हैं। मुख्य न्यायाधीश रोस्टर के मास्टर हैं और ऐसे में उन्हें जज बदलने की मांग पर निर्णय लेने का आदेश देना उनके काम में दखल है।
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इसके साथ ही ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो याची को यह शक्ति दे कि वह जज बदलने के लिए मुख्य न्यायाधीश को मांगपत्र दे सकती है। जब कोई प्रावधान ही नहीं है तो रिट पिटीशन पर सुनवाई की ही नहीं जा सकती है। यदि ऐसा निर्देश जारी किया भी गया तो वह भविष्य के लिए सही उदाहरण पेश नहीं करेगा।