फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court dismissed anticipatory bail plea of accused of misdeed

हाईकोर्ट की टिप्पणी : अग्रिम जमानत मासूमों को बचाने के लिए, अपराधियों की गिरफ्तारी रोकने के लिए नहीं

Tue, 09 Mar 2021 12:40 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 09 Mar 2021 12:40 PM IST
सार

  • पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज की अपने भाई की पत्नी से जबरदस्ती करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका 
  • हाईकोर्ट की टिप्पणी, अपनी भाभी से इस तरह का कृत्य करने वाले को अग्रिम जमानत का कोई अधिकार नहीं 
  • मासूमों को प्रताड़ना से बचाने के लिए दिया गया है अग्रिम जमानत का हक 

विज्ञापन
Punjab-Haryana High Court dismissed anticipatory bail plea of accused of misdeed
Highcourt - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपने भाई की पत्नी से जबरदस्ती करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी भाभी से इस तरह का कृत्य करने वाले को अग्रिम जमानत का कोई अधिकार नहीं है।

विज्ञापन


मेरठ निवासी सुहैल अहमद ने याचिका दाखिल करते हुए अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की थी। याची के भाई की पत्नी ने फरीदाबाद पुलिस को शिकायत देते हुए बताया था कि 23 अगस्त 2018 को उसका विवाह हुआ था। विवाह के बाद से ही ससुराल वाले दहेज के लिए उसे परेशान कर रहे थे। 
विज्ञापन



इसके बाद वह अपने पति के साथ अलग रहने लगी। 30 अक्तूबर 2019 को जब उसका पति घर पर मौजूद नहीं था तब याची जबरन कमरे में घुस गया और जबरदस्ती की। इसके बाद जाते हुए धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो वह उसके मां-बाप को मार देगा। जब शिकायतकर्ता का पति लौटा तो उसने सारी बात उसे बताई।  महिला का कहना था कि शिकायतकर्ता का साथ देने की बजाय उसके पति ने उसे पीटना शुरू कर दिया। तब से वह पति से अलग रह रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


फरीदाबाद फास्ट ट्रैक ने भी खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका
हाईकोर्ट को बताया गया कि 13 जनवरी 2021 को फरीदाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट भी याची की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार का कृत्य करने का आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।


अग्रिम जमानत का हक मासूमों को प्रताड़ना से बचाने के लिए दिया गया है जिसका प्रयोग अपराधियों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed