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हरियाणा: 2426 शिफ्ट अटेंडेंट की नियुक्ति को मंजूरी, प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट ने की खारिज
Fri, 13 May 2022 03:49 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 13 May 2022 03:49 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि आयोग को भर्ती प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। हाईकोर्ट का नीतिगत मामलों में दखल केवल तभी होना चाहिए जब भर्ती में किसी तरह के द्वेष या दुर्भावना के चलते निर्णय लिया गया हो।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर हरियाणा व दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के शिफ्ट अटेंडेंट के 2426 पदों के लिए चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भर्ती को हरी झंडी दे दी है। भर्ती के विज्ञापन के अनुसार 160 अंक की परीक्षा होनी थी और 24 अंकों का इंटरव्यू और 16 अंक अनुभव के थे। लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू के समय कट ऑफ में अनुभव के अंक नहीं जोड़े गए। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सिंगल बेंच ने सरकार को लिखित परीक्षा के अंकों के साथ अनुभव के अंक जोड़ने के बाद कट ऑफ बनाकर इंटरव्यू के लिए आवेदकों को बुलाने का आदेश दिया था।
सिंगल बेंच के आदेश को हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी। आयोग ने बताया कि लिखित परीक्षा के अंकों के साथ अनुभव के अंक शुरू में ही जोड़ देंगे तो कई मेधावी शुरू में ही नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे, इस कारण अनुभव के अंकों को चयन सूची बनाते हुए जोड़ने का निर्णय लिया गया।
हाईकोर्ट ने आयोग का तर्क सही बताया। कहा, आयोग को भर्ती प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। हाईकोर्ट का नीतिगत मामलों में दखल केवल तभी होना चाहिए जब भर्ती में किसी तरह के द्वेष या दुर्भावना के चलते निर्णय लिया गया हो। इस मामले में भी किसी एक वर्ग के आवेदकों के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह नियम सभी आवेदकों के लिए समान है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को खारिज करते हुए नियुक्ति की मंजूरी दी।
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सिंगल बेंच के आदेश को हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी। आयोग ने बताया कि लिखित परीक्षा के अंकों के साथ अनुभव के अंक शुरू में ही जोड़ देंगे तो कई मेधावी शुरू में ही नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे, इस कारण अनुभव के अंकों को चयन सूची बनाते हुए जोड़ने का निर्णय लिया गया।
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हाईकोर्ट ने आयोग का तर्क सही बताया। कहा, आयोग को भर्ती प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। हाईकोर्ट का नीतिगत मामलों में दखल केवल तभी होना चाहिए जब भर्ती में किसी तरह के द्वेष या दुर्भावना के चलते निर्णय लिया गया हो। इस मामले में भी किसी एक वर्ग के आवेदकों के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह नियम सभी आवेदकों के लिए समान है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को खारिज करते हुए नियुक्ति की मंजूरी दी।
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