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दो लड़कियों ने पहले साथ रहने के लिए लड़ी कानूनी लड़ी, और अब 13 दिन बाद...अलग-अलग

Thu, 11 Oct 2018 11:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 Oct 2018 11:43 AM IST
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Punjab Haryana High court Decision in Two Girls Case
girl friends case in highcourt
दो लड़कियों ने एक दूसरे के साथ रहने के लिए पहले कानूनी लड़ी और जीती। उसके 13 दिन बाद अचानक हो गया कुछ ऐसा कि दोनों अब अलग-अलग हो गई हैं। मामला चंडीगढ़ का है। दो लड़कियों को साथ रहने के लिए सुरक्षा दिए जाने के 13 दिन के भीतर ही परिजनों से हाईकोर्ट में मिलने के बाद एक ने महिला साथी के साथ न जाकर परिजनों के साथ जाने का निर्णय ले लिया।
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ऐसे में कानूनी लड़ाई लड़ दो लड़कियां साथ पाने के 13 दिन बाद ही अलग हो गई हैं। 27 अक्तूबर को हाईकोर्ट ने इन दोनों को साथ रहने की अनुमति देते हुए सुरक्षा पर डीसीपी पंचकूला को निर्णय लेने के आदेश दिए थे। जिसके बाद उन्हें प्रोटेक्शन होम भेज दिया गया था।
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याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट गोबिंद ढांडा ने हाईकोर्ट को बताया था कि पंचकूला की दो लड़कियां जो बालिग हैं वह साथ रहना चाहती हैं। उन दोनों के परिवार वाले उन्हें साथ रहने नहीं दे रहे हैं और उन्हें जान का खतरा है।
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उन्होंने कहा कि दोनों लड़कियां बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रहना चाहती हैं और ऐसे में उन्हें रोका नहीं जा सकता। परिवार वालों को आपत्ति जाति को लेकर हैं और ऐसे में दोनों की जान पर बनी हुई है। एक लड़की सामान्य वर्ग की है तथा दूसरी अनुसूचित जाति की।

जान को खतरा बताते हुए दायर की थी याचिका

Punjab Haryana High court Decision in Two Girls Case
girl friends case in highcourt
जान को खतरा बताते हुए दोनों ने डीसीपी कार्यालय में भी अपनी रिप्रेजेंटेशन दी थी लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए डीसीपी को याचिकाकर्ताओं द्वारा सौंपी गई रिप्रेजेंटेशन पर फैसला लेने के आदेश दिए थे। डीसीपी ने इसके बाद दोनों को प्रोटेक्शन होम भेज दिया था।

इसके बाद एक लड़की के परिजनों ने याचिका दाखिल कर बेटी से मिलने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने मीडिएशन सेंटर में मिलने की अनुमति दे दी। वहां से वापस आने के बाद बेटी ने अपनी साथी के साथ न रहकर अपने परिजनों के साथ रहने का फैसला लिया। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने उसे परिजनों के साथ जाने की अनुमति दे दी।

18 साल की आयु बहुत छोटी ऐसे निर्णय लेने के लिए
जिस बेटी से मिलने के लिए परिजनों ने अर्जी दाखिल की थी उसकी उम्र 18 साल की थी। कोर्ट ने इस उम्र को देखते हुए कहा कि बेटी को परिजनों से मिलना चाहिए। यह उम्र कागजों में बालिगों की है लेकिन इस उम्र को पूरी तरह से परिपक्वता और खास तौर पर इस तरह के निर्णय के लिए परिपक्व उम्र मानना मुश्किल है।
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